एक सोनपुर गांव के गोपाल और गोपाल की पत्नी- कमला के कहानी।

1 दिन की बात है. जब गोपाल अपने खेतों में काम कर रहा था। तो उसकी हाल एक धातु से लगकर फस गई। जिसके कारण वह हाल आगे नहीं ले जा पा रहा था।
एक सोनपुर गांव

गोपाल वहां पर तुरंत अपने कूड़ार की मदद से एक गड्ढे खोदे तो उस गड्ढे में उसने पाया कि एक आभूषण भरा घड़ा नजर आया।

 यह देखकर गोपाल बहुत ही हराम तो रहा ही परंतु उसे मन ही मन बहुत खुशी हो रही थी। यह देख कर उसकी मन में लड्डू फूट रहे थे। परंतु वह आभूषण से भरा घड़ा को निकालना चाहा। परंतु वह उसे निकाल नहीं पा सका यह देख कर और भी परेशान हो गया। गोपाल सोचने लगा इसे ले जाने के लिए दो लोगों की आवश्यकता होगी परंतु मैं किसे लाऊं।

तभी गोपाल को अपनी पत्नी के बारे में ख्याल आया क्यों ना मैं उसकी सहायता से इसे अपने घर तक ले जाया जाए। 
परंतु गोपाल की पत्नी कमला बहुत ही दयालु तो थी।
 परंतु उसे अपने बात अपने मैं नहीं रख पाती थी। यह सोच कर गोपाल सोचा कि उसे लाने से अच्छा है। कि गांव को ही ले आना परंतु मैं क्या करूं। इसे कैसे घर ले जाऊं।

गोपाल बहुत ही सोचने लगा कोई तरकीब ना मिलने के कारण वह घड़ा को उसी जगह मिट्टी से ढक कर वह घर चला जाता है। घर जाकर वह अपनी पत्नी कमला से भोजन मांगता है। भोजन कर शाम को वह बाजार चला जाता है। गोपाल बाजार से बहुत सारी मछलियां और लाल रंग खरीदता है। और उसे लेकर अपने खेत की ओर चला जाता है। और उस खेत में लाल रंग को घोलकर पूरी खेतों में छिड़काव करता है। और मछलियों को भी बीजों की तरह बूंद देता है। जिससे लगे कि उसके खेतों में बारिश हुई है। यह काम कर गोपाल घर जाता है। घर जाते जाते रात हो जाती है। जिसके कारण भोपाल की पत्नी कमला सो जाती है।

 गोपाल धीरे से जाकर अपनी पत्नी को जगाता है। और बोलता है। कमला चलो हमारे खेतों में बारिश हुई है। कमला बोलती है। यहां तो कोई बारिश नहीं हुई है। आप पगला तो नहीं हो गए हैं।

 गोपाल बोलता है।कमला मैं सच कह रहा हूं। हमारे खेतों में मामूली बारिश नहीं हुई है। बल्कि लाल पानी और मछलियां की बारिश हुई है। तुम्हें विश्वास नहीं है तो चल कर देख लो कमला यह सुनकर कमला और गोपाल दोनों लालटेन लेकर अपने खेत की ओर जाते हैं। तो कमला वहां लाल रंग की बारिश देखकर बहुत ही खुश हो जाती है। यह देखकर कमला सारी मछलियां उठाने लगती है। और बोलती है। कि मैं इसे कैसे ले जाऊं। गोपाल बोलता है कि मैं एक घड़ा रखा हूं। यहां तुम चाहो तो उस में भरकर ले जा सकती हो घर। वह उस घड़े में सारी मछलियों को डालकर गोपाल और गोपाल की पत्नी दोनों टांग कर अपने घर लाते हैं। घर लाकर गोपाल अपनी पत्नी को सुलाने के बाद उस घड़े को अपने घर के आंगन के बीचो बीच गाड़ देता है। जिससे उसकी बीवी को पता ना चले सुबह होते ही गोपाल अपनी पत्नी को बोलता है। कमला नाश्ता लाओ मुझे खेत पर जाना है। लेट हो जाऊंगा कमला तुरंत नाश्ते लेकर आती है। और बोलती है। कि आप रात को जो घड़े से भरे मछलियों को लाए थे। वह कहां पे रखे हैं। गोपाल ऐसा बोलता है, जिसे उसे कुछ पता ही नहीं उसने बोला क्या तुम रात को सपना देख रही थी।

 क्या गोपाल की पत्नी कमला बोलती है। कि रात को हम और आप दोनों ही तो गए थे। क्या आपको नहीं पता यह बात आस-पास के पड़ोसियों को सुनाई पड़ी वह उसके घर में बहुत सारे आये। उन्होंने बोला क्या तुम्हें घड़ा मिला है। बताओ तुमने उस घड़े में क्या मिला गोपाल की पत्नी कमला सारी बात बताई। तो उसे उस बात पर किसी ने नहीं भरोसा किया। कि इस के खेत में मछलियों की बारिश यह सुनकर सारे लोग बोलने लगे यह पागल हो गई है। तुम जरा आराम कर लो इसके बाद तुम डॉक्टर के पास चले जाना कमला सोचने पर मजबूर हो गई। कि क्या मैं रात को सपना देख रहा था। फिर उस बात पर जोर नहीं डाली और राज की बात राज ही रह गई।

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिली दोस्तों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिली कि कोई भी काम हमें सोच समझ कर करना चाहिए। वरना वह हमारे हाथ से चला जाएगा। गोपाल यह तरकीब नहीं लगाता। तो आज उसके पास वह आभूषण भरा घड़ा नहीं रहता।



राकेश इटली वाला इसकी एक बेहतरीन कहानी आज हम आप लोगों को इस ब्लॉग में प्रदान करने वाले हैं। चलिए कहानी का आनंद लेते हैं।-


राकेश एक इटली वाला है। वह बहुत ही नेक दिल और दयालु इंसान हैं। वह रोजाना सुबह-सुबह उठकर अपने ठेले पर जाकर इटली बनाकर लोगों को अपनी इटली को बेचकर अच्छे खासे मुनाफे कमाता था।
राकेश इटली वाला

 परंतु उसे कभी ऐसा घमंड नहीं हुआ। कि वह अपनी इटली सबसे अच्छी बनाता हूं। मार्केट में तभी उसके पड़ोस वाले ठेलें पर इटली बेचने वाला राहुल नाम का व्यक्ति आया और उसने भी इटली का ही कारोबार शुरू किया। परंतु राकेश का धंधा जम जाने के कारण राकेश को अच्छी कमाई होती। परंतु राहुल को कमाई नहीं होने के कारण 1 दिन ऐसा हुआ कि दंग रह जाएंगे।

राहुल एक रात चुपके से राकेश के घर में चला जाता है। और वहां राकेश को नींद में पाकर उसने राकेश को चाकू पेट चाकू भोक देता है। जिसके कारण उसकी मृत्यु हो जाती है।
 परंतु राकेश मरा नहीं वह आत्मा बनकर अपने शरीर छोड़ देता है। और बाहर निकलते ही वह देखता है। अपने शरीर को खून से लथपथ तो वह डर जाता है। परंतु वह सोचता है। यह कैसे हुआ तो वह जान पाता है। कि मेरी हत्या हो गई।

 परंतु उसे यह नहीं समझ में आ रहा कि आखिर मेरी हत्या किसने कि राकेश सारा शहर आत्मा में के रूप में भटकता रहा। परंतु उसे अपनी दुकान पर जाने की आदत थी। वह सुबह होते ही दुकान चला जाता है। आत्मा को वहां  पता है। कि राहुल अपने ठेले पर इटली बेच रहा है। यह देखकर राकेश को समझ में आ जाता है। कि इसी ने ही मेरी हत्या की है। परंतु राकेश कुछ कर नहीं सकता। यह सोचकर वह बहुत ही हैरान हो गया। परंतु उसे एक तरका आई वह आत्मा राहुल के घर जाकर राहुल का आने का इंतजार करता।

 तभी राहुल अपने घर पर आता है। तो वह आत्मा उससे आवाज देती है। परंतु उसे कोई दिखाई नहीं पड़ता राहुल जोश में आकर बोलता है। सामने आओ कौन हो। डरपोक राकेश बताता है। क्या तुम ही ने मेरी हत्या की है। यह सुनकर राहुल डर जाता और बोलता है। मुझे माफ कर दो भाई मैं ऐसा कभी नहीं आज के बाद करूंगा। तुम मुझे माफ कर दो परंतु राकेश की आत्मा नहीं माने और उसे राहुल के शरीर में घुस जाता है। और अगले दिन जैसे ही राहुल अपने ठेले की दुकान पर जाता है। तो वहां अपने बोर्ड पर फ्री प्लेट लिखकर इटली बनाने लगता है। और वह इटली बिल्कुल राकेश की तरह मनाने लगता है। क्योंकि उस राहुल के शरीर में राकेश की आत्मा जो थी वह फ्री में इटली बेचता है। और शाम को होते ही वह आत्मा राहुल के शरीर से निकल जाता है। और जब राहुल अपनी मुनाफा जोड़ता है। तो वह पाता है। कि इस बार तो मुझे बहुत ही नुकसान हुआ।

 परंतु उसे कुछ समझ में ही नहीं आता अगले दिन भी ऐसा ही हुआ ऐसा एक-दो हफ्ते चलता रहा। ऐसा देखकर लोग सोचने लगे आखिर यह राकेश की तरह इटली तो बनाता है। परंतु राहुल फ्री में क्यों बेचता है। इतनी अच्छी इटली इस बात पर लोगों ने बहुत ही सोचने लगे तभी सारे लोग इस बात का पता लगाने उसके पीछे पीछे घर तक गए तो वह राहुल अपने हिसाब को जोड़ने लगा तो इस बार फिर भी वही बहुत घाटा हुआ जिसके कारण हुआ उस आत्मा का जिक्र करते हुए। बोलने लगा कि मुझे ऐसा नहीं करने काम था। और उसी घर में राकेश की आत्मा घूम रही थी। और उसे बोल रही थी। कि तुम जैसा किए हो। वैसा ही तुम फल पाओगे।

 मैं तुम्हारे काम को कभी भी सफल नहीं होने दूंगा यह बात सारे लोगों को पता चली तो उसने राहुल की सच्चाई का पता चला गांव वाले पुलिस को बुलाकर उसे जेल में भेज दिए और फिर राकेश की आत्मा शांत होकर पृथ्वी से चली गई।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है। कि हमें किसी से जलना नहीं चाहिए। हमारे पास जितना है। उतना में ही रहना चाहिए ना कि हमें लालच करना चाहिए।