लालची भाइयों के बीच बंटवारा।


राम और श्याम दो भाई थे। जिनके बीच कुछ ऐसा हुआ है। जिसके कारण उन्हें अपनी अपनी बंटवारा करनी पड़ी परंतु उनके बंटवारे में बहुत ही प् समस्या थी।
लालची भाइयों के बीच बंटवारा।

राम बोलता है। श्याम मैंने यहां पर पैसे रखे थे।  श्याम बोलता है। कि मैंने उस पैसे को भिखारी को दे दिया। क्योंकि उसके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं था। इसलिए मैंने सारा पैसा भिखारी को दे दिए। यह बात सुनकर राम को बहुत ही गुस्सा आया और उसने बोला उसे भूख लगी थी। तो तुम उसे भोजन दे देते सारे पैसे तुमने क्यों दिए? श्याम बोलता है, अगर मैं उसे भोजन देता तो मैं क्या खाता? भैया' राम बोलता है, तुम पूरी तरीके से गधा हो तुम्हारा कुछ भी नहीं हो सकता। 

इसी तरह का सिलसिला बहुत दिनों तक चलता रहा जिसके कारण राम जोस में आकर अपने बीमार पिता जी के पास जाकर बोलता है। कि हमारे बंटवारे कर दीजिए। मुझे उस श्याम के साथ नहीं रहना। बीमार पिता बोलता कि देखो मिलजुल कर रहने में ही भलाई है, तुम लोगों को इस तरह से झगड़ा करने से कोई फायदा नहीं है। यह बात बता कर श्याम को अगले ही दिन उनकी मृत्यु हो गई।

परंतु राम को यही बात खाए जा रही थी, कि मैं इसके साथ कभी नहीं रहूंगा और दोनों भाइयों अपने अपने बीच बंटवारा करना शुरू कर दिया। परंतु उनके बंटवारे में एक समस्या है। दुविधा यह थी। कि घर में एक मुर्गी और एक बेड जो की उसे बांटने में उन लोगों की परेशानी हो रही थी।

 तभी राम ने बोला कि देखो श्याम में रात को इस बेड पर सो लूंगा और दिन को तुम इस बेड पर सो लेना और इस मुर्गी की बात रही तो मुर्गी का अंडा मैं लूंगा और मुर्गी तुम्हारा होगा। परंतु ध्यान रहे सिर्फ मेरा अंडे का अधिकार रहेगा, और तुम्हारा मुर्गि यह श्याम को मंजूर और बोला ठीक है।

जब शाम को दोनों भाइयों ने काम कर कर घर पर आए तो राम बेड पर और श्याम जमीन पर सोया जो कि उसे बहुत ही गुस्सा आया परंतु और क्या कर सकता था। कुछ भी नहीं किया और अगले ही सुबह मुर्गी ने एक अंडा दिया जो राम लेकर बाजार जा कर अंडे को बेचकर वह पैसे ले लिया। ऐसा बहुत दिन तक चलता रहा श्याम अपनी मुर्गियों को दाना देता।

 परंतु अंडे उसके भाई राम लेकर बाजार जाकर बेच देता और उससे उसकी मुर्गी से कोई फायदा नहीं होता इस तरह श्याम को पता चलने लगा कि मेरा भाई मुझे धोखा दे रहा है। तभी उसने सोचा कि मैं अब क्यों न इसे सबक सिखाओ।

श्याम एक दिन अपने काम पर नहीं जाता है। और वह बेड के सारे बिस्तर को धोने के लिए डाल देता है। और मुर्गियों को जाकर बाजार बेच देता है। और उसके बदले पैसे ले आता है। श् जब राम घर आता है। शाम को तो बोलता है। श्याम तुम इस बेड के विस्तार को कहां रखा है। श्याम बोलता है। भैया मैंने तो उसे धोने के लिए ही डाला है। परंतु अभी सूखा ही नहीं और दोनों भाई रात को सोए श्याम खाली बेड पर और श्याम जमीन पर आराम से सोता है।

 अगले दिन वह मुर्गी के पास जाता है। अंडे के लिए तो मुर्गी ही नहीं यह देख कर गुस्सा से बोलता है। श्याम तुमने मुर्गी कहां रखा है। मुझे अंडे की जरूरत है। श्याम बड़े आराम से बोलता है। भैया मैंने तो मुर्गी को बेच दिया। क्योंकि उस मुर्गी पर सिर्फ मेरा ही अधिकार था। और कोई मुझे फायदा भी नहीं था।

यह सब देख कर राम को अब पता चल जाता है। कि मुझे मिलजुल कर ही रहना चाहिए। मुझे आपस में झगड़ने से हम लोगों को कोई भी फायदा नहीं हो सकता। इसलिए राम और श्याम दोनों भाई मिलजुल कर रहते हैं। और दोनों को समान अधिकार होता है। अपने घरों में।

दोस्तों हमें इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है? इस कहानी से या शिक्षा मिलती है कि
 हमें रिश्तो के बीच लालच नहीं करना चाहिए वरना रिश्तो में दरार आ जाती है।


मोहन दूधवाला।

मोहन एक दूध वाला है। वह बहुत बड़े-बड़े सपने देखा करता है। परंतु उसके पास एक गाय के अलावा और कुछ भी नहीं है। जो कि वह अपने गायों को दुह कर उसे दूध को बेचकर धन इकट्ठा करता है। परंतु उसके सपने पूरे नहीं हो सकते। उस दूध से हैरान और लाचार था। क्योंकि वह अपने सपने उस दूध को बेचकर पूरा नहीं कर सकता।
मोहन दूधवाला।

एक दिन मोहन दूध बेचकर बाजार से आ रहा था। तो उसे थकान महसूस होती है। जो कि वह पास वाले बरगद के वृक्ष के नीचे बैठ जाता है। और आराम फरमाता है। और यह बात को सोचते रहता है। कि मैं अपने सपने को कैसे पूरा कर पाऊंगा, तभी उसे पास के नदी के पानी पर नजर जाती है। और वह सोचने लगता है। कि यह पानी का कोई भी रन नहीं है। इससे जिस भी चीज में डालो उसी चीज में घुलमिल जाती है। यह बहुत ही बेहतरीन लगी।

 तभी मोहन को एक युक्ति आती है। क्यों ना इस जल को अपने दूध में डालकर इसे बाजार में बेच कर बहुत ही अच्छा रहेगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा कि मैंने दूध में  जल मिलाया।

अगले दिन वह मोहन बाजार जाने से पहले अपनी दूध में थोड़ा जल मिला देता है  और उसे जाकर बाजार में बेच आता है। और उससे पहले से ज्यादा धन की प्राप्ति होती है। जो कि मोहन को बहुत ही खुशी होती हैं, क्योंकि उसे अपने मुनाफे में बढ़ोतरी हो गई थी। 

धीरे-धीरे वह अपने दूध में जल को पढ़ाता चला गया और बाजार में बेचता चला गया। एक दिन वह दूध बेचकर बाजार से आ रहा था। तो वह उसी बरगद के पेड़ के नीचे बैठ जाता है। अपने दोनो धन के पोटली को सामने रखा कर आराम करने लगता है, तभी उसे नींद आ जाती है। जब वह नींद से उठता है। तो वह अपने पास धन की पोटली ना देखकर। वह बहुत ही गुस्सा होता है। और तभी उसकी नजर पेड़ पर दो बंदरों पर नजर आती है। जो उसके दोनों धन की पोटलियों को लेकर पेड़ पर चढ़े हुए थे। यह देख कर मोहन बहुत ही चिल्लाता है। और उन्हें पत्थर मारता है। परंतु वह उसके नकल ही करते जा रहे थे। यह देखकर मोहन सोचा क्यों ना कुछ उपाय निकाला जाए। यह मेरी नकल कर रहे हैं।

 तभी मोहन अपने सर से पगड़ी को निकाल कर जमीन पर पटका तो दोनों बंदरों ने दोनों पोटली को नीचे फेंक दिया। परंतु एक पोटली उसके पास गिरा और दूसरा पोटली पानी में वह चला गया यह देखकर मोहन बहुत ही रोने लगा और बोलने लगा कि ,वह मेरा धन, तभी एक उस रास्ते से साधु गुजर रहा था। तो उसने बोला क्यों तुम रो रहे हो। बेटा,।

 मोहन अपनी सारी बात बताई तो मोहन को साधु ने बताया कि देखो तुम्हें तुम्हारे काम से ज्यादा पैसे नहीं मिले हैं। क्योंकि तुम इतने दिनों से तुम अपने दूध में पानी मिलाकर बेच रहे थे। वह पानी वाला धन पानी में बह गया और दूध वाला धन तुम्हारे पास है। इसलिए तुम ऐसे काम मत करो कि तुम्हें अपनी शर्मिंदगी पर रोना पड़े।


मंगतराम आम वाला।


मंगतराम एक आम वाला व्यापारी है। जो कि उसके गांव में बहुत ही बड़े आम के दुकान खुला पूरा दिन यह सोचने में बिता देता था, कि मुझे आम को बेचकर ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने हैं। परंतु वह छोटे-मोटे ग्राहकों को आम नहीं दिया करता उसके लिए वह दूसरा व्यक्ति रखा करता था।जो कि एक दो दर्जन आम के लिए उसे ग्राहक को अपने रखे हुए आदमी के पास भेजा करता था। मंगतराम केवल बड़े बड़े व्यापारियों को ही आम बेचा करता था।
मंगतराम आम वाला।

एक दिन मंगतराम के दुकान में 25 पेटी आम खराब होने वाले थे। तो मंगतराम ने अपने आमरस में फैक्ट्री में सारे खराब आम को लेकर पहुंचा देता है। और आमरस जल्दी ही बनकर मार्केट में आ जाती है। और बिकने लगती है।

 तभी एक व्यक्ति ने आकर 50 पैकेट आमरस की मांग करता है। और वह 50 पैकेट आमरस इसलिए लेता है। क्योंकि उसके बेटे की जन्मदिन के लिए उसे अपने स्कूल में उसे सारे लोगों को आमंत्रित किया था। इसलिए वह 50 पैकेट आमरस लेता है। और अपने बेटे के स्कूल में चला जाता है।

 परंतु मंगतराम के भी बेटे उसी स्कूल में पढ़ता था, और उसी व्यक्ति के लड़के का दोस्त था। और सारे लोगों को उस आमरस को बांट दिया उस स्कूल में।

उस आम रस को पीने से बहुत सारे बच्चों को बीमारी हुई, जो कि सारे विद्यार्थियों को अस्पताल में भर्ती किया जाता है। तो डॉक्टर ने उस आमरस को टेस्ट करने के लिए प्रयोगशाला में भेजता है। तो उस आम रस में खराब आमो के कारण वह आमरस बहुत ही खराब हो चुका था। 

जीसी के कारण सारे विद्यार्थी बीमार हो चुके थे। जिसमें से एक मंगतराम का भी बेटा बीमार था। वह दौड़ते हुए अपने बेटे के पास आता है। और बोलता है, कि डॉक्टर मेरे बेटे को क्या हुआ डॉक्टर ने बोलता है। सारा प्रॉब्लम इसी आमरस के कारण हुआ है। जो कि आप ही के फैक्ट्री में बनाई जाती है। यह देखकर मंगतराम अपने आप को बहुत ही कोसता है। और पुलिस को हवाले कर देता है, खुद को और मंगतराम अब किसी को भी खराब आम नहीं देता और सभी ग्राहकों को एक समान मानता है।
दोस्तों इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है। कि हमें खुद के फायदे के लिए दूसरों का नुकसान कभी नहीं करना चाहिए।