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एक समय की बात है. जब इस धरती पर दानों का राज रहा करता था. मैं उस समय की बात को लेकर एक कहानी कविता मेरे मन में उभर रही है. जिसके बारे में आप इस ब्लॉग पढ़ेंगे. चलिए जानते हैं-
 एक समय की बात है. जब इस धरती पर दानों का राज रहा करता था.

एक दिन एक लोहार अपनी काम कर रहा था. जैसा कि आप जानते हैं लोहार क्या-क्या करता है। वह लोहे के काम करता है। एक दिन वह अपने कक्ष में काम कर ही रहा था। तो उसकी पत्नी आकर बोली चलिए खाना खा लीजिए । लोहार चलो मैं खा लेता हूं। गुस्से से बोलती है। लोहार की पत्नी आप सिर्फ दिन भर आप इसी कक्ष में अपने काम तो करते हैं पर आप इतने तो कमा नहीं पाते हैं। हम लोग अपना भरण-पोषण कर सके। इस काम को करने का क्या फायदा लोहार बोलता है। कि देखो ज्यादा लालच बुरी बला है। यह बात सुनते सुनते पत्नी की कान मानो फटी गई हो।

तभी उस लोहार की एक कुटिया की तरह एक साधु चला आ रहा था। वह असल में साधु तो नहीं था। परंतु वह एक कोई भगवान था। वह उस लोहार की घर पर जाकर बोलता है। कि देखो बेटा मुझे खाना कई दिनों से नहीं खाया हूं। क्या तुम मेरी कुछ मदद कर सकते हो परंतु लोहार का भी वही हाल था। वह भी खाना के मारे भूखा अपने कक्ष में काम कर रहा था। तो वहा लोहार अपनी सारी बातें बताई साधु को। 



साधु बोलता है। कि बेटा तुम तो मेरे से भी ज्यादा परेशान और दुखी लग रहे हो। परंतु लोहार ने बोला कि देखिए बाबा अभी ठंड के समय है। आप रुक जाइए मैं आपके लिए आग लगा दे रहा हूं। आप कुछ देर अपने शरीर को गर्म कर लीजिए। फिर चले जाएगा साधु सोचा ठीक है। कुछ ना कुछ तो काम आया यह लोहार वह अपने हाथ को आगे कर सकने लगा। वह अपनी ठंडी को अच्छी तरह भगाने के बाद साधु बोलता है। देखो बेटा तुम मुझसे तीन वरदान मांगो एकदम से चौक जाता है। और बोलता है। मैं आपसे क्या मांगू वह सोचता है। कि यह साधु हमें खुली आंखों से सपना दिखा रहा है।

 परंतु ऐसा नहीं था साधु बोलता है। देखो बेटा मेरे पास समय नहीं है। तुम जल्दी से अपना तीन वरदान मांग लो वरना मुझे यहां से जाना है। लोहार सोचने के बाद बोलता है। कि क्या देगा।  इसलिए वरदान मांगता है।

बाबा मुझे एक ऐसा वरदान दीजिए कि मैं इस हथौड़े को जिस किसी के हाथ में दू और काम करने के लिए बोलो तो वह सिर्फ काम करता ही रहे। और अपनी मर्जी से थोड़ी को रोकना सके। सिर्फ मेरी इजाजत के जब तक मैं ना बोलूं तब तक वह यह हथौड़ा को रखना पाए। साधु बोलता है। चलो मैं तुम्हारी इच्छा पूरी कर दिया जल्दी से दो वरदान और भी मांगो।

लोहार जाट से बोलता है। बाबा मैं चाहता हूं। कि इस कुर्सी पर जो भी बैठे वह मेरी इजाजत के बिना न उठ सके ना हील सके। क्या आप मुझे दे सकते हैं। बाबा उसकी इच्छा पूरी कर दी।


साधु तुरंत बोलता है। कि तीसरा वरदान मांगा तो तुम सोच समझकर माना। 

 मुझे एक ऐसा वरदान दीजिए। कि मेरे इस पैसे की तिजोरी में जो भी पैसे रखो वह मेरे अलावा ना कोई निकाल सके। ना कोई इसमें हाथ लगा सके। इससे पैसे निकालने के लिए मेरी जरूरत होनी चाहिए। ऐसा वरदान दीजिए बाबा।

साधु बोलता है। मूर्ख तुम इस 3 वरदान से तुम एक अच्छी जिंदगी बिता सकते थे। तुम बेवकूफ हो ऐसा कह कर साधु वहां से चल दिया। परंतु उस लोहार को अभी भी यकीन नहीं था। कि यह साधु वरदान दिया है। वह कोई काम का है। वह सिर्फ मुझे उल्लू बना रहा था। लोहार ऐसा ही सोचता था।

यह बातें सुनकर और देकर लोहार की पत्नी को बहुत गुस्सा आया और बोला आप जिंदगी में कोई भी अच्छे काम नहीं कर सकते हो। यह बात लोहार के दिल पर लगी जिससे वह घर को छोड़कर जाने का फैसला किया। वह अगले ही सुबह घर से निकल पड़ा कहीं जंगल की तरफ जहां वह अकेला रह सके।

उसे कोई ना देखने वाला हो ना कोई बोलने वाला बहुत दूर जाते जाते  रास्ते में एक जंगल मिली उस जंगल में कोई भी इंसान कुछ समय बाद एक बुड्ढा एक था। उसके नजर में दिखा परंतु वह बुड्ढा व्यक्ति नहीं था परंतु वह एक दानव था। लोहार को नहीं मालूम वह उसे जाकर मिलता है। बाबा आप इस जंगल में क्या कर रहे हो। वह दानव बोलता है। कि मैं यहां किसी को ढूंढ रहा हूं। जो मेरे काम करें मैं उससे 3 हजार दूंगा जो मेरे काम करेगा। लोहार झट से बोलता है कि मैं आपकी काम करूंगा। बाबा बोलिए क्या करना है फिर वह सोचता है। बुड्ढा इस जंगल में खोज रहा है काम करने के लिए लोगों को कुछ ना कुछ तो बात है।

 उससे ऊपर से नीचे की ओर देखने लगा तभी उसके पैर पर नजर गई और पैर भैंस की थी। जिससे वह लोहार समझ गया वह भाग भी नहीं सकता था। यह सोच कर बोलता है। कि बोलिए बाबा क्या काम है बुड्ढा साधु बोलता है देखो मैं तुम्हें 3000 दूंगा।

 परंतु मेरी एक शर्त है कि मेरी जब भी काम हो तब मैं तुझे बुलाऊंगा लोहार कहा ठीक है मैं अभी घर जाता हूं। फिर मैं आपके लिए जब भी काम पड़े तब आप बुला लीजिए। लोहार को 3000 देते हुए उससे घर की पता पूछ ली लोहार उस पैसे से सब्जी मछली बहुत सारे थेला भर कर सामान ले गया। अपने घर पर और अपनी पत्नी को बोला कि देखो इसे जल्दी से बताओ मुझे जोरों की भूख लगी है। 

पत्नी  तुम इतने सारे धन कहां से लाए पति कुछ भी नहीं बताया पत्नी सोच रही थी। कि इससे कुछ मिले हैं परंतु ऐसा नहीं था उस पैसे से कुछ दिन खाया पिया खूब खाने पीने के बाद उसे पैसे की कमी हो गई जिससे वह अपने कक्ष में जाकर काम करने लगा।

तभी एक वही साधु आकर बोलता है। बेटा तुम अपनी वादा को याद तो रखे हो ना क्या तुम मेरे साथ चलने के लिए तैयार हो लोहार बोलता है कि हां हां क्यों मैं इस काम को खत्म तो कर लूं साधु बोलता है। फिर तुम कर लो फिर बोलता है। लोहार लोहे को पीट दीजिए। मैं अपनी पत्नी को अलविदा कह कर आता हूं। बुड्ढा साधु बोलता है। ठीक है।

वह हथौड़ा बुड्ढे साधु के हाथ में दे देता है। लोहा को पीते पीते अपने हाथ को रोक नहीं पाता देखकर बुड्ढा साधु उससे बोलता है। कि मैं तुझे 3000 और देता हूं। तुम मुझे छोड़ दो और कुछ दिनों के लिए छुट्टी भी देता हूं। इसलिए वह लोहार उस बुड्ढे को छोड़ देता है।

कुछ दिन बाद फिर से वही बुड्ढा साधु आता है। और बोलता है क्या तुम इस बार तो चलने के लिए तैयार होना लोहार तुरंत बोलता है। यहां बाबाbएकदम चलता हूं। आप थोड़ा आराम कीजिए मैं आपके लिए पानी लाता हूं। वह उसी कुर्सी पर बैठा दिया जिस पर उसे वरदान मिला था। वह बैठ तो गया परंतु उठ ना सका यह सोच कर कि यह भूल नहीं सकता उसकी पत्नी आकर उसे खूब डंडे से मारती है।
 पत्नी बोलती कि आज के बाद फिर तुम यहां आओगे। बूढ़ा साधु बोलता है नहीं बाबा मैं तुझे और भी पैसे देता हूं। मुझे जाने दो मैं आज के बाद यहां कभी नहीं आऊंगा। यह सुनकर लोहार उसे छोड़ देता है। और उसे जाने देता है।

परंतु वह बुड्ढा साधु इंसान थोड़ी ना था। वह तो शैतान था। वह फिर से आता है परंतु हुआ उसके काम करने वाले कक्ष में नहीं जाकर वह कुछ ऐसा युक्ति लगाता है। कि वह लोहार मुझे खुद लेकर जाए वह सामने एक सोने की सिक्के में बदल कर उसके दरवाजे पर गिर जाता है। वह लोहार जैसे ही शाम को कक्ष से बाहर निकलता है। तो उसे उसी के पर नजर जाती है। और उसी को अपने जादुई थैली में डाल लेता है। और वह अपने घर जैसे ही पहुंचता है। वह बुड्ढा साधु बोलता है। लोहार अचानक से डर जाता है। कि यह आवाज कहां से आ रही है। फिर वह अपनी तिजोरी की तरफ देखता है। और तो उसे वही शैतान नजर आता है।
परंतु वह उस थैली को खोलता नहीं है। और उसे बंद कर खूब मारता है। और बोलता है। कि देखो मुझे आजाद कर दो मैं तुझे बहुत सारे पैसा दूंगा और मैं तुम्हारे पास कभी नहीं आऊंगा।

लोहार को बहुत सारे पैसा दिया। परंतु लोहार एक लोहार की पत्नी मिलकर एक तरकीब लगाएं और उसे अपनी थेली में बंद कर जमीन के नीचे गाड़ दिया। जिससे वह सदा सदा के लिए ही उस ज़मीन में रहगया और लोहार अपने जिंदगी अच्छी तरह से बिता सकें।

पत्नी बाद में बोलती है। चलो तुम कुछ तो अच्छे काम के हो। कि उस जादुई साधु से ऐसा वरदान मांगा जिससे इस शैतान से छुटकारा मिला।

हमें इस कहानी से क्या शिक्षा मिली दोस्तों मुझे इस कहानी से यही शिक्षा नीली लालच बुरी बला है। और मुझे सोच समझ के काम करनी चाहिए। अगर यह लोहार सोच कर काम करता तो आज इसे शैतान से कभी भी मुलाकात नहीं होती।