1 कहानी(गजपति नाम का लालची मुखिया)

कहानी(गजपति नाम का लालची मुखिया

एक मालाबार गांव में एक गजपति नाम का लालची मुखिया रहता था। वह बहुत ही लालची और स्वार्थी था। वह लोगों का धन खुद पर ही खर्च किया करता था।
उस गांव में पानी की तंगी चल रही थी। परंतु 1 साल उसमें अकाल होने के कारण उस गांव की नदी का पानी सूख जिससे लोगों को और भी दूर जाकर पानी लानी पड़ती थी। यह बात अपने गांव के मुखिया गजपति को सारे गांव वाले मिलकर अपनी समस्या बताए।
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 परंतु गजपति अपनी चालाकी से उन्हें वहां से जैसे तैसे कर कर भेज देता है। और बेचारे गांव वाले चले आते हैं। परंतु उसी गांव में एक मोहन नाम का पढ़ा-लिखा और चलाक लड़का करता था। वह खुद ही गजपति के पास गया और उसने गजपति को कहा कि मुखिया जी आप गांव वालों की बात मान लीजिए। 
परंतु गजपति ने बोला इसमें थोड़े बहुत पैसे लगेंगे तो मैं कुछ कर सकता हूं। परंतु कुआं खोदने में बहुत सारा पैसा लगेगा मोहन बोला सरकार ने तो पैसा देते ही है।

हम लोगों के लिए परंतु गजपति ने बोला मेरे पास अभी पैसे नहीं है।

सोहन समझ गया कि अब यह गजपति कुछ करने वाला नहीं है। और वहां से घर चला आया और सारे गांव वालों को एक साथ बुलाकर उन्हें बताया कि हम इस समस्या का हल खुद निकाल सकते हैं। थोड़ी-थोड़ी पैसे मिलाकर एक कुआं हम लोग खोज सकते हैं। यह गांव वालों की बात बहुत अच्छी लगी और थोड़ी-थोड़ी पैसे सभी मिलाकर जमा कर लिए और वह कुआं खोदने में लगे कुआं खोदते-खोदते कुछ दिनों के बाद उस कुएं मैं पखल का बड़ा चट्टान पड़ गया।

जिसके कारण गांव वालों बहुत हैरान हो गए और मोहन से कहें कि यह चट्टान तोड़ने के लिए हमें और भी पैसे की जरूरत होगी। परंतु गांव वालों के पास इतने पैसे नहीं थे। कि वह इस चट्टान को तोड़कर इस से पानी निकाल सके। मोहन कहा यह काम मुझ पर छोड़ दीजिए, मैं इसका हल निकाल दूंगा, " जहां चाह वहां राह" यह कह कर मोहन उस रात सोचते सोचते।
एक हल निकाला और 4-5 बाल्टी मिट्टी का तेल लेकर उस कुएं में जाकर गिरा दिया,और सारे गांव वालों को हल्ला कर दिया, कि इस कुएं से तेल निकल रहा है। यह तेल वाला कुआं यह बात गजपति के पास पहुंची।

गजपति तुरंत वहां पहुंचा, और गांव वालों से कहा गांव वालों आप लोगों की समस्या पानी ही ना है। मैं इसका हल निकाल दूंगा, यह कुआं में खुद्वता हूं। और गजपति ने बहुत सारे धन लगाएं कुएं के तेल में कुआं खोदने के बाद उससे पानी निकलता हुआ देखकर। 

गजपति हैरान हो गया और गांव वाले बहुत ही खुश हो गए परंतु गजपति को चुप रहना पड़ा।

दरसल मोहन ने जान-बूजकर उस रात तेल के बाल्टी को उस कुएं में पलटा था। कि यह तेल वाला कुआं है।
क्योंकि गांव वालों के पास इतने पैसे नहीं थे। कि उस चट्टान को तोड़ कर पानी निकाल सके।

 मोहन को यह बात सिर्फ गजपति तक पहुंचाने थी। जिससे वह खुद कुंवा खोद सकें। और यही हुआ गजपति खुद आकर यह कुआं खोदा।
दरअसल या बात पूरे गांव वालों की भी नहीं पता है। और वहां के गांव वासी पानी की तंगी से बाहर निकल सकें।
  

2  कहानी(एक गांव में रामू नाम का एक किसान)


एक गांव में रामू नाम का एक किसान रहा करता था वह बहुत ही दयालु और मेहनती था उसके ही बार में उसके अलावा और कोई भी नहीं जिसके कारण उसके पास खेती भी करने के बाद बहुत समय बच जाता था जिससे वह भले मत लोगों की मदद करता था और उसे गांव में बहुत कॉम भी दिया जाता था।

परंतु उस काम का एक भी पैसा नहीं लेता था जिसके कारण गांव वाले उसे बहुत ही पसंद करते थे गांव के लोग उससे तरह तरह के काम कराया करते थे जैसे बाजार से सब्जी लाना फसल काटना बीज बोना हल जोतना नारियल तोड़ना शरीर की मरम्मत करना तरह तरह के काम कराते थे।

 गांव वाले परंतु वह किसी भी काम था ₹1 नहीं लेता था वह अपना भरण-पोषण खुद अपने खेतों में काम करके ही वह अपना जीवन यापन करता था।
जब भी किसी गांव वाले को काम करवाना होता तो रामू को है पुकारते थे उससे इतना काम कर आते थे कि वह दिनभर थक जाता था।

 और उसके पास अपने खेतों में काम करने के लिए कुछ दिनों से समय भी नहीं बचता और उसे किसी ने खाना भी नहीं पूछता कि तुमने खाया कि नहीं ऐसे ही करते करते बरसात की मौसम आ गई परंतु रामू अपने खेत की जुताई नहीं कर पाया जिससे वह बहुत ही दुखी हुआ वह दुखी के मारी एक नदी के पास जाकर बैठ गया और फूट-फूट कर रोने लगा तभी नदी के बहाव में एक पिल्ला चमकता सा सोना उसकी ओर टुकड़े के रूप में बहता आया।

 वह देखा तो वह सोना था जिसे वह उठाया तो वह सोचा कि मैं इतना सोना क्या करूंगा तभी एक भगवान के रूप में एक भिखारी आता है रामू के पास और रामू को कहता है कि मैं कुछ दिनों से मुझे खाना नहीं मिला है।
 क्या तुम मेरी मदद करोगी बेटा रामू बोलता है मेरे पास तो अभी खाने के लिए कुछ भी नहीं है परंतु मेरे पास यह सोना है जिससे तुम बेचकर अपनी खाना खरीद सकते हो लो तुम इसे खरीद कर अपने खाना खरीद लेना भगवान के रूप में भिखारी वहां से सोना लेकर जाता है।
 और वह फिर से बच्चे के रूप धारण कर कर रामू के पास वापस आता है और रामू को वह बच्चा बोलता है क्या तुम भी या सोना के लिए इस नदी के पास आते हो रामू बोलता है क्या तुम जानते हो इस सोने के बारे में बच्चा बोलता है।
हां यहां दिल्ली सोना आती है नदी के बहाव में रामू बोलता है परंतु मैंने आज ही यहां आया हूं।
बच्चा बोलता है कि तुम मेरे पीछे-पीछे आओ रामू पूछता है कि तुम मुझे कहां ले जा रहे हो परंतु बच्चा उसकी प्रश्नों का जवाब देना अच्छा नहीं समझता है और उसे अपनी पीछे-पीछे बुलाता है और उसे एक सोने की पहाड़ दिखाता है जिससे रामू देख कर चौक जाता है और बचा से बोलता है।
क्या तुम इसी पहाड़ को दिखाने के लिए मुझे ला रहे थे बच्चा बोलता है हां तभी बच्चा भगवान का रूप ले लेता है और रामू देखकर अचंभित रह जाता है और भगवान बोलता है कि तुम बहुत ही दयालु हो रामू तुम इस पहाडी का मालिक हो तुम उसकी अच्छी से लोगों को सेवा करना बुरे भले लोगों को इसकी सहायता से तुम मदद करना यह कह कर भगवान वहां से गायब हो जाते हैं और रामू पहाड़ के अंदर जाता है तो उसके बहुत सारे उसके नौकर उससे प्रणाम करते हैं जिससे वह और भी खुश हो जाता है।

 परंतु उसके परिवार में कोई नहीं था जिसके कारण वह अपनी सोने की पहाड़ को अपने गांव वासी का मदद करता था सोना देकर और पास के राजा की पुत्री से रामू का विवाह होता है। और उसके कुछ दिनों के बाद उसे बेटा भी एक होता है और तीनों खुशी खुशी रहते हैं।

इस कहानी से या शिक्षा मिलती है कि अगर रामू वहां पर भिखारी को वह सोना नहीं देता तो वह आज के सोने की पहाड़ की मालिक ना बन पाता इसीलिए हमें लालच नहीं करनी चाहिए।




3 कहानी(एक गांव में मोहन राम का किसान रहा करता था)


एक गांव में मोहन राम का किसान रहा करता था। वह बहुत ही दयालु और नेक दिल इंसान था वह अपना भरण-पोषण बाजार से सब्जी लाकर उसे मैं बेचता था जो पैसे उसे मिलते उसी से उसका भरण पोषण होता परंतु उसकी एक पुत्री भी थी।

 जिसके कारण उसकी पत्नी हैरान रहती थी कि मेरे पति तो इतना कमा ही लेते हैं कि परिवार का भरण पोषण हो सके परंतु मैं अपनी बेटी को एक अच्छे स्कूल में नहीं पढ़ा सकता।
 इसीलिए वह चिंता में डूबी रहती यह बात अपने पति मोहन को बताती है मोहन सोचता है कि मेरे पास एक खेत है क्यों ना उसी में सब्जी खुद से उगाया जाए और उसे बेचा जाए जिससे हमें ज्यादा मुनाफा हो सके। यह बात उसकी पत्नी को भी अच्छा लगा और रामू सुबह उठकर खेत हाल लेकर अपने खेतों की ओर चला गया और उसकी जुताई करने लगा जुताई करते करते उसकी हाल एक फोर्स चीज में फंस गई जिससे वह बहुत परेशान हो गया।

 क्योंकि उसकी हर टूट गई थी वह अपनी कुदाल से वहां पर खोदना शुरू किया तभी उसे एक संदूक दिखाई पड़ता है परंतु वह सोचता है कि इसे शाम होने तक इंतजार करते हैं इसके बाद इसे घर ले जाते हैं वह शाम तक इंतजार करने के बाद उसे अपने घर में लेकर जाता है उसकी पत्नी उसे संदूक लेकर हैरान रह जाती है और अपने पति से पूछती है।

इस संदूक में क्या है मोहन फटी दरवाजा बंद करो और मोहन की सर से संदूक को उतार कर नीचे रखती है फिर से मोहन की पत्नी बात को अधूरा टी है कि इस संदूक में क्या है।
 मोहन बोलता है मुझे भी नहीं पता इसमें क्या है दोनों उस संदूक को खोल कर देखते हैं तो उसमें बहुत सारा भरा सोना दिखाई पड़ता है जिससे दोनों खुश हो जाते हैं और सोचते हैं कि अब मुझे ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है। और मैं अपनी बेटी को भी एक अच्छी स्कूल में पहुंच सकूंगा यह दोनों अपने मन में सोच कर बहुत खुश होते हैं  और वह खाना खाकर शाम को अच्छी नींद लेकर सोते हैं और सुबह रामू उठकर अपनी पत्नी से कहता है।

कि जरा कुछ संदूक से सोने लाना मैं बाजार जा कर बेच कर आता हूं उसकी पत्नी सुख के पास जाती है तो संदूक पूरा खाली दिखाई पड़ता है जिससे सभी लोग परेशान हो जाते हैं और सोचने लगते हैं कि रात को हमारे अलावा इस संदूक के पास और कोई भी तो नहीं था परंतु यह सोना ले गया। कौन वह अपनी बेटी से भी पूछती है बेटी बोलती है मुझे नहीं मालूम मा पूरा दिन बैठे-बैठे गुजार दिया शाम होते ही मोहन की बेटी को प्यास लगता है और वह किचन से पानी पीकर लौटती ही है।
 तो उसे उस संदूक में बहुत सारा सोना दिखाई पड़ता है और वह अपने माता-पिता को भी दिखाता है यह देखकर मोहन हैरान हो जाता है कि यह कैसे हुआ शायद पांच के कोई ले गया होगा यह सोचते हैं। कि शायद उसे अपनी गलती का एहसास होने के कारण वह सारे सोने मुझे फिर से लौटा दी फिर से सुबह उठते हैं सारे लोग तो देखते हैं कि उस संदूक से सोना फिर से गायब ऐसा 2-3 दिन तक होता रहा मोहन की पत्नी बोलती है।

 कि यह संदूक हमारे कोई काम का नहीं है मोहन भी कहता है हां यह मेरे कोई भी काम का नहीं रहा संदूक इसमें दिन होते ही सोने गायब हो जाते हैं मैं इस संदूक का करूंगा क्या यह सोचकर दोनों ने संदूक को फिर से उसी खेत में ले जाकर गाड़ दिए और उस खेत पर अपनी मेहनत से फसल कर कर बाजार जाकर बेचकर एक अच्छी कमाई कर सकता था मोहन और वह अपनी बेटी को भी एक अच्छी स्कूल में पढ़ा सकता था।

और उसे और किसी भी बात का चिंता नहीं था कि बस उसे अपनी बेटी कोएक अच्छी स्कूल में पढ़ाना ही एक मकसद था मोहन को जो मोहन को या सफलता मिली थी गई।

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है जो हमारा है उसी में ही हमें रहना चाहिए ना की किसी के धन पर आश्रित रहना चाहिए।