1 कहानी (सोने की फसल)

सोने की फसल
Google


एक गांव में रामू नाम का एक किसान रहता था। वह बहुत ही दयालु और सोच समझकर निर्णय लेता था, वह अपने परिवार का भरण पोषण अपने खेतों में उपजे अनाज को बेचकर पूरे परिवार का भरण पोषण करता था।

1 साल वह अपने खेतों में फसल लगाने ही वाला था। की उसके सारे फसल भारी वर्षा के कारण पूरे फसल नष्ट हो गए। जिसके कारण उस साल उसका फसल नहीं हो सका।

परंतु रामू उदास नहीं हुआ, वह अगले वर्ष की तैयारी में लग गया।
वह अपनी सारी धन बीजों और अनाजों को खरीदने में लगा दिया, कि इस साल फसल हो ही जाएगा।

वरना मैं तो बर्बाद हो जाऊंगा, यह सोचकर वह अपने खेतों में बीजों को लगा दिया, परंतु जैसे ही उसके फसल पकने वाले ही थे। फिर से वही घटना घटी भारी वर्षा के कारण सारे फसल नष्ट हो चुके थे। रामू बहुत ही उदास मायूस होकर अपने खेत के आर पर बैठा था।

 रामू को देखकर पास वाले खेत में काम कर रहे मजदूर मोहन पास आता है, और बोलता है, रामू तुम इतने उदास क्यों हो?
रामू बोलता है, कुछ नहीं मोहन,  फिर से पूछता है। मैं तुम्हें कई दिनों से देख रहा हूं। कि तुम मायूस सी दिख रहे हो।
क्या बात है? मुझे भी बताओ रामू बात मोहन को बताता है। परंतु मोहन का भी वही हाल था। जो रामू का हाल था। इसमें मोहन उसकी मदद भी नहीं कर सकता।

इसलिए वह भी बहुत ही मायूस होकर बैठ गया। शाम होते ही रामू और मोहन एक साथ घर की ओर चलते हैं, बीच रास्ते में उसे एक कबूतर दिखाई पड़ता है। जो जाल से जकड़ा हुआ होता है।

रामू उसे देखकर कबूतर को उस जाल से मुक्त करता है, कबूतर हवा में उड़ कर एक देवी का रूप ले लेता है। यह देखकर राम और मोहन बहुत ही चौक जाते हैं। तभी वह देवी बोलती है। है रामू मैं एक शराप के कारण कौवे का रूप में आ चुका था। जिसका निवारण यह था  कि कोई इंसान मुझ पर दया कर मुझे आजाद करे तभी मैं मुक्त हो सकता हूं। यही मेरा शराप था।

देवी बोलती है, मैं तेरी दया पर प्रसन्न होता हूं। तुम जो कुछ मंगो  मैं तुम्हें दूंगा मोहन झट से बोलता है। कि मेरे खेतों में सोने की फसल चाहिए। मोहन की इच्छा पूरी करती है। देवी परंतु राम बहुत ही चालाक और बुद्धिमान व्यक्ति था।
वह कभी भी अपना काम सोच समझकर ही करता था। वह यह वरदान मांगता है। कि मुझे अपने खेतों में सोने जैसी फसल उगे यही मुझे चाहिए, और कुछ भी नहीं।

देवी उन्हें इच्छा के अनुसार उनकी मदद कर दी, तभी मोहन बोलता है, कि चलो अपने खेतों की ओर देखते हैं। कि यह देवी हमें बुद्धू तो नहीं बना रही है। चलो खेत की ओर देखते हैं, राम और मोहन दोनों अपने खेतों की ओर फिर से चल देते हैं।

 परंतु मोहन अपने खेतों में सोने की फसल देखकर वह बहुत ही खुश होता है। परंतु वह पास जाता है, तो उसके सारे फसल सोने की हो चुके थे, और  मोहन उस फसल को काट सकता था। देख कर मन को बहुत ही गुस्सा आया, फिर मोहन बोला चलो रामू तुम्हारी फसल देखते हैं। कैसी हैं। रामू अपने खेत की ओर ले जाता है, मोहन परंतु रामू को खेत मैं बहुत ही अच्छी फसल लगी देखकर मोहन देवी पर बहुत ही गुस्सा होता है।

तुरंत देवी वहां प्रकट होती है। और बोलती है, देवी कि तुम ही ने तो मांगा था। मोहन कि मुझे सोने की फसल चाहिए, वह मैंने दिया रामू तो यह मांगा था। कि मुझे सोने की तरह फसल उगने चाहिए मेरे खेतों में तुम मुझे मत कोसो तुम अपनी गलती खुद किए हो इसमें मैं तुम्हारी कुछ भी नहीं कर सकती और देवी वहां से चली जाती है।

परंतु रामू नेक दिल और सच्चा इंसान था, वह मोहन को कहता है, कि मैं तुम्हें अपनी फसल को बेचकर आधा हिस्सा तुम्हें दूंगा तुम निराश मत हो मोहन और रामू अपने फसल को काट कर उससे जो पैसे मिले वह आधा-आधा दोनों राम और मोहन बांट लिए और दोनों कोई अपने परिवार का अच्छा सा भरण पोषण कर सकें।

इसीलिए हमें कोई भी काम जल्दबाजी में नहीं करनी चाहिए। यह कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है। हमें रामू की तरह बनना चाहिए ना कि मोहन की तरह

आप इसे अपने लाइफ में जरूर अपनाना यह जिससे आपको अच्छी कामयाबी मिलेगी।

Read more gold story

2 कहानी (बालू नाम का एक अनाथ बच्चा रहता था)

 2 कहानी ( बालू नाम काएक अनाथ बच्चा रहता था
Google



रामपुर गांव में बालू नाम का एक अनाथ बच्चा रहता था। उसका कोई भी नहीं था। अपने गांव को ही अपना परिवार मानता था। गांव में पूरे दिन काम करने के बाद जो उसे मिलता वह खाकर अपना गुजारा किया करता था। और पास वाले मंदिर में जाकर रात को सोया करता था। परंतु कुछ साल बीत गए।

परंतु उसे पूरी पेट खाने नहीं मिलने के कारण वह बहुत ही दुबला पतला हो गया था, एक रात वह अपने पास के मंदिर में जाकर सो रहा था। तब उस मंदिर के पुजारी सारे लड्डू चुरा कर चोरी छुपे लेकर जा रहा था। तभी बालू की नजर  पुजारी पर पड़ती है, और बालू पूछता है। कि पुजारी जी आप अपनी इच्छा को प्राप्त करने के लिए आप क्या करते हैं?
 पुजारी जी बोलते हैं, कि देवी मां से मांगती हूं। तुम भी देवी मां के चरण में जरूर जाओ तुम्हारी मनोकामना जरूर पूर्ण हो गया। बालू बेटे बालू यह बात सुनकर वह अपने पूरे तन मन से देवी मां की भक्ति करने लगता है। वह दो हफ्तों तक ना खाना ना पीना ना जल के बिना देवी मां का भक्ति करता है।एक रात बालू को देवी मां साक्षात प्रकट होती है। और बालू से बोलती है, बोलो बेटे तुम्हें क्या चाहिए।

 बालू वरदान में यह मांगता है, कि  में जिस भी चीज पर मैं अपने हाथ को रखु वह सोने में बदल जाए। मनोकामना देवी मां बालू को पूर्ण करती और देवी मां वहां से चली जाती और बालू बहुत ही खुश होता है, वह अपने जादू का परीक्षण करना चाहता था। वह मंदिर को छूता है। तो पूरा मंदिर सोने का बन जाता है। बालू यह देखकर बहुत ही खुश होता है, और अगले ही सुबह पूरे गांव वालों को बालू एक जगह पर इकट्ठा कर एक वृक्ष के पास बुलाता है, और बोलता है, कि मेरे पास एक जादुई शक्ति है, गांव वालो पूछते हैं, कि तुम्हारे पास क्या जादुई शक्ति है?
 बालू तुरंत वृक्ष को छूता है। तो पूरा वृक्ष सोने में तब्दील हो जाता है, यह गांव वाले देखकर बहुत ही चौक जाते हैं। और रामू को बहुत ही प्यार करते हैं। और खेलते कूदते सभी लोग अपने घरों तक बालू को बुलाते हैं। जिससे पूरा घर एक सोने की नगरी में बदल जाता है। यह देखकर बहुत ही गांव वाले खुश होते हैं।

परंतु एक दिन ऐसा होता है। कि रामू अपने भोजन करने जाता है, तो बालू अपने टोकरी को जैसे ही पकड़ता है, वह सोने में तब्दील हो जाता है।

बालू यह देख कर और भी हैरान हो जाता है। और बालू की शक्तियां उससे भोजन से दूर रख रही थी। यह देख बालू बहुत ही दुखी और मायूस होकर पास के नदी के किनारे जाकर बैठ गया और उसे जोर से प्यास लगी वह पानी पीने जैसे ही जल में हाथ को डालता है। पूरा जल सोने में तब्दील हो जाता है।

यह देखकर गांव वाले बहुत ही बालू को बुरा भला कहते हैं, बालू कभी सोचा भी नहीं होगा कि ऐसा भी हो सकता है। उसे गांव वाले छोड़कर चले जाते हैं। और भालू बहुत ही रोने लगता है, तभी देवी मां प्रकट होती है। और बालू से बोलती है, देखो बेटा तुम्हारे इच्छाओं का क्या परिणाम हुआ बालों बोलता है। कि हे मां मुझे पहले की ही जैसे कर दो मैं सिर्फ चाहता था। कि मेरे पास कुछ ऐसे शक्तियां हो जिससे मुझे गांव वाले बहुत ही प्यार करें और मुझे अपना माने परंतु ऐसा नहीं हुआ।

  उससे अपना वरदान लेकर उसे गांव वाले को उसने के रूप में स्वीकार करने का उसे वरदान मिला और बालू पहले के जैसा तो हो गया परंतु उसे गांव वाले बहुत ही स्नेह करते थे। और उसे अपना मानते थे।

हमें इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है? 
हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है। लालच‌ बूरी बला है। हमे लालच नहीं करना चाहिए।