Mayapur ke lalchi jamindar(मायापुर के लालची जमींदार)


मायापुर गांव में एक बहुत ही बड़ा जमींदार रहा करता था। उसके पास बहुत सारे खेत थे। जिसके कारण वह जमीदार कहलाता था। और वह बहुत धनी भी था। परंतु मायापुर के गांव के निवासियों के पास जमीन नहीं हुआ करते थे, जिसके कारण मायापुर के निवासी जमींदार के पास जाकर उससे खेत एग्रीमेंट करा कर उसमें फसल उगाते थे। 
           
Mayapur ke lalchi jamindar(मायापुर के लालची जमींदार)

परंतु जमींदार का एक शर्त रहता था। वह शर्त रहता था, कि आधी फसल तुम्हारी और आधे फसल हमारी मजदूर किसानों को यह शर्त मंजूर थे। परंतु फसल पैदा होने के बाद जो फसल अच्छी होती वह जमींदार लेकर जाता और बाकी खराब फसल बचती वह मजदूरों के लिए ही छोड़ जाता जिससे दूर को 20/30प्रतिशत का ही लाभ होता था। इससे गांव के सारे किसान बहुत ही दुखी हुआ करते थे, 
        परंतु उसी गांव में एक मोहन नाम का किसान रहा करता था, उसकी एक बेटी थी। मोहन का बीमारी कुछ ऐसी हो गई थी। जिसके कारण वह अपने काम नहीं कर सकता परंतु उसकी बेटी बहुत ही चालाक और बुद्धिमान थी, वह खेती करने में रुचि रखती थी। वह बोली कि पिताजी आज से मैं खेती किया करूंगा। मुझे खेती में बहुत ही मन लगता है। मोहन कहा कि तुम लड़की हो पर वह नहीं मानी वह जमींदार के पास चली गई और जमींदार को बोली आज से मैं आपकी खेत की फसल में उगाया करूंगा, जमींदार यह सुनकर हैरान हो गया परंतु जमींदार सोचा कि इसे तो बेवकूफ बनाने में और भी मजा आएगा। यह सोचा मोहन की बेटी बोली जमींदार जी मेरी खेत की एग्रीमेंट करिए। 

       परंतु जमींदार बोला कि मेरी कुछ शर्ते हैं। खेत की नीचे की फसल तुम्हारी और खेत की ऊपर की फसल हमारी मोहन की बेटी बोलती है। मुझे मंजूर है, आप एग्रीमेंट कराइए एग्रीमेंट कराने के बाद वह खेतों में प्याज की अंकुर लगा दी 4 महीने के बाद जमींदार अपने खेत पर आता है, तो वह देखता है। कि मोहन की बेटी खेतों में प्याज की खेती की थी। वह देखकर हैरान हो जाता है, और मोहन की बेटी बोलती है। कि जमींदार जी आपकी शर्ट के अनुसार जमीन की अंदर की फसल हमारी और जमीन के ऊपर की फसल आपकी यह देखकर जमींदार भयभीत हो जाता है। फिर से अगले मौसम में मोहन की बेटी जमींदार के पास आती है। और वह फिर से एग्रीमेंट कराती है। और इस बार जमींदार की सर्च कुछ अलग थी वह बोला की जमीन की नीचे की फसल हमारी और जमीन के ऊपर की फसल तुम्हारी मोहन की बेटी बोली सही है। वह अगले दिन ही उस खेत में धान की बीजों को बो दिया कुछ दिनों के बाद जमींदार अपने खेतों पर फिर से आता है,।

और वह धान की फसल देखकर दंग रह जाता है। फिर से वही बात बोलती है। मोहन की बेटी की आपके सर के अनुसार जमीन के अंदर की फसल आपकी और जमीन की ऊपर की फसल हमारी यह कह कर वह अनाज अपने घर ले जाती है।।फिर से अगले फसल के मौसम में मोहन की बेटी जमींदार के पास आती है। और बोलती है, की अब आप की क्या शर्ते हैं। जमींदार बोलता है कि तुमने मुझे बहुत ही बुद्धू बनाया, तुम सोचती होगी कि मैं इसे सबक सिखा दिया। परंतु इस बार जमीन की शर्तें यह है। कि जमीन की ऊपर और नीचे की फसल हमारी और बीच की फसल तुम्हारी यह कह कर वह कहा कि क्या तुम्हें मंजूर है। मोहन की बेटी बोलते हैं। हां मुझे मंजूर है। वह दूसरे दिन ही उस खेत में गन्ने की खेती लगा देती है। गन्ने की खेती तैयार होने के बाद जमींदार जब अपने जमीनों पर जाने लगता है, तो वह खाली बैलगाड़ी लेकर जाता है। कि मैं इस बार तो मैं ही जीतूंगा। वहां जाता है, तो खेतों में गन्ने की फसल देखकर वह दंग रह जाता है, और मोहन की बेटी बोलती है, कि जमींदार जी खेत की नीचे की फसल आपकी और खेत की ऊपर की फसल आप की ओर बीच की फसल मेरी यह कह कर उस सारी गन्ने अपने गाड़ियों में भरकर ले जाती है।

जमींदार बहुत ही दुखी हो जाता है। और वह मोहन की बेटी से क्षमा मांगता है। कि मुझे माफ कर दो बेटी मैंने बहुत ही किसानों को सताया है। मोहन की बेटी बोली की अगली बार से आप किसी को नहीं सताएंगे। तो मैं आपको माफ कर दूंगी। जमींदार सारे किसानों को बुलाकर उनके हिसे के फसल उन्हें दे दिए। जिससे सारे किसान मोहन की बेटी के कर्जदार होगा। मोहन की बेटी घर गई और उसके माता-पिता उसकी चालाकी कि शाबाशी दिया।
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