बंदरबाड़ी गांव

बंदरबाड़ी गांव

बंदर बाड़ी में आदमी से ज्यादा बंदर दिखाई पड़ते थे। वहां के लोग बंदरों से परेशान हो गए थे। वह बंदर को भगा भगा कर परेशान हो गए थे। परंतु बंदर भागते ही नहीं थे।

तभी एक गांव में साहूकार आया। जो बंदरों का व्यापारी हुआ करता था। वह गांव वालों को ऐलान किया, कि तुम इन बंदरों से परेशान हो क्या मैं तुम्हारी कोई मदद कर सकती हूं। गांव वालों ने बोला नेकी और पूछ पूछ व्यापारी बोला कि, तुम एक बंदर मुझे दो और ₹10 लेकर जाओ। यह सुनकर गांव वाले बहुत खुश हुए और सभी बंदर पकड़ने लगे, क्योंकि उन्हें ₹10 जो मिल रहे थे, और वह बंदर व्यापारी को देखकर ₹10 इनाम पाते, ऐसे ऐसे काफी बंदर गांव से खत्म हो गए थे। 
कुछ बंदर थे जो पकड़ में नहीं आते थे, फिर साहूकार ने अपनी तरकीब लगाई और बोला अब जो बंदर आप लोग लाओगे, उसके ऊपर ₹20 का इनाम दूंगा, फिर से गांव वालों का जोश भर गया और जो बंदर बचे थे। वह बंदर पकड़कर व्यापारी को देकर ₹20 इनाम पाते। ऐसे ऐसे  कर बंदर वाडी गांव में अब एक भी बंदर नहीं दिखाई पड़ते थे। फिर व्यापारी ने कहा कि अब तुम लोग एक बंदर पर ₹50 तक मैं दे सकता हूं। 

अगर तुम लोग बंदर लाओ,तो ऐसा सुनकर बंदरबढ़ी गांव के लोग ₹50 के चक्कर में वह अपने आसपास के जंगलों से बंदर पकड़कर लाते हैं। और और साहूकार को ₹50 में बेचते हैं। और पूरा जंगल बंदरों से खाली हो चुका था। तभी व्यापारी को काम के सिलसिले में शहर जाना था, व्यापारी अपने दोस्त को यह काम सौंप कर चला गया। दोस्त ने ऐलान किया कि देखो गाव वाले तुम्हें बंदर के ही जरूरी ना है। तुम मुझसे ₹40 में एक बंदर खरीद लो और व्यापारी को ₹50 में बेच देना। गांव वालों ने ऐसा सुनकर बहुत खुश हुए और सभी लोग ज्यादा से ज्यादा बंदर खरीदें और व्यापारी का दोस्त गांव से चला गया। बंदर ले कर फिर गांव वाले यह आशा में थे, कि वह व्यापारी कब आएगा और मैं यह बंदर को ₹50 में बेचूंगा यह देखकर कई महीने निकल गए परंतु अभी तक यह व्यापारी नहीं आया बहुत लोगों की तो आशा ही नहीं थी। कि वह आएगा और ऐसा ही हुआ वह नहीं आया व्यापारी वह चला गया। अगर आपको दिखाई दे तो जरूर बताइयेगा बंदरबाड़ी के लोग आज भी व्यापारी का इंतजार कर रहे हैं। कभी ना कभी तो आएगा और बंदरबाड़ी में आदमी से ज्यादा बंदर ही दिखाई पड़ते थे।

यह कहानी से क्या शिक्षा मिलती है। यही कि लालच बुरी बला है।