आज की इस कहानी में हम लोग एक ऐसे लालची साहूकार की कहानी पड़ेगे जो अपने आप पर घमंड करता है। चलिए शुरू करते हैं-
लालची साहूकार की कहानी

लालची साहूकार की कहानी


             एक शहर में मोहम्मद नाम का साहूकार रहा करता था। वह बहुत ही लालची और घमंडी था, वह लोगों को शुद्ध देता था, परंतु वह शुद्ध के साथ-साथ उनसे बहुत काम लिया करता था।
         वह लोगों को बहुत सताता था। जब उसे अपनी पैसे समय से नहीं मिलते तो लोगो को डराता था। तब उस शहर में तीन साहूकार घूम रहे थे। तीनों साहूकार का नजर मोहम्मद पर पड़ी साहूकार अपने में बातचीत करें और बोले या मोहम्मद साहूकार बहुत घमंडी और लालची है। तीनों साहूकार ने मिलकर एक तरकीब निकाली। तीनों साहूकार में से एक साहूकार एक बीमार गधा लेकर उसके दुकान पर जाकर ₹1000 का खुदरा मांगता है। मोहम्मद बोलता है। मैं इसमें से एक रुपए रख लूंगा साहूकार ने बोला ठीक है, तभी तीनों साहूकार में से दो साहूकार आकर बोले देखो यह वही गधा है, जो हमें चाहिए था, एक साहूकार बोलता है हां-हां यह वही गधा है, एक साहूकार बोलता है, बताओ तुम कितने में बेचोगे साहूकार बोलता है। कि मैं इसे नहीं बेचूंगा।
        एक साहूकार उसे 5000 देने को तैयार हो गया परंतु वह गधा नहीं बेचा तो साहूकार ने और उसे इनाम बढ़ा दी और बोला 10000 तभी गधा वाला साहूकार बोला मैं 50000 से कम नहीं लूंगा यह देखकर मोहम्मद बहुत हैरान रह गया, और दोनों साहूकार को एक तरह बुलाकर बोला बताओ तुम्हें इस गधे में ऐसी क्या दिखाई दे रही है जो तुम इतनी कीमत दे रहे हो दोनों साहूकार ने बोले यह करामाती गधा है, जो गड़ा सोना को ढूंढ निकालता है, यह ऐसी वैसी गधे नहीं है, मोहम्मद यह बात सुनकर हैरान हो गया परंतु ऐसी बातों को नहीं मानता इसलिए वह खड़ा हो कर देखने लगा साहूकार फिर अपनी दाम बढ़ा दी कहीं कि 30000 दूंगा इससे ज्यादा नहीं दूंगा क्या तुम दोगे गधा वाला साहूकार बोलता है। तभी एक साहूकार ने अपने गधे वाले दोस्त से झगड़ गया और गधे वाले साहूकार ने बोला अब तो मैं इसे हरगिस भी मैं तुम लोगों से नहीं बेचूंगा तब मोहम्मद बोला कि मेरे पास इससे भी अच्छे बहुत सारे गधे हैं। कहो तो मैं तुम्हें 5 ही हजार में दे दूंगा दोनों साहूकार बोलते हैं नहीं मुझे यही गधा चाहिए मोहम्मद बोलता है, अब तो तुम्हें यह नहीं देगा तभी दोनों साहूकार बोलते हैं कि तुम उससे 35000 में ले लो और मैं तुमसे 40000 में ले लूंगा यह गधा मोहम्मद को बहुत अच्छी लगी यह बात मोहम्मद ने उसे 35000 देखकर वह गधा ले लिया मोहम्मद जो ठहरा था। लालची वह अपनी गधे की दाम को 50000 कर दी और बोला मैं इसे 50000 में बेचूंगा दोनों साहूकार ने अपने-अपने बोला कि क्या यह वही गधा है, जो हमें लेना था।
         एक सहुकार बोलता है, यह दूसरी गधा है। यह सुनकर मानव जैसी मोहम्मद की जमीन पैरों तले जमीन खिसक गई और बोला देखो तुम ही ने तो बोला था,  कि मैं तुमसे 40000 में ले लूंगा यह गधा तुम खरीद लो, अब तुम इसे क्यों नहीं खरीदते दोनों साहूकार बोलते हैं। कि मैं यह गधा नहीं खरीदना चाहता हूं। मुझे अब नहीं चाहिए।

मोहम्मद जोर-जोर से सारे शहर के निवासियों को इकट्ठा कर लिया और बोला देखो भाइयों बहनों यह गधा हमसे 35000 में खरीद वाकर इसे अब नहीं खरीदते तभी एक गांव वाले बोले यह गधा तो 5000 का भी नहीं है, आप इतने दम से कैसे दे दिए। मोहम्मद सारी बातें बताया कि तुम 35000 में ले लो और मुझे 40000 में दे देना तभी एक आदमी बोलता है, आप इतने भी तो नासमझ तो नहीं है कि यह आपको बोले और आप खरीद लिए यह सुनकर साहूकार अपने आपको सोचने लगा कि मैं यह गधा क्यों लिया था।

      तीनों साहूकार शहर जाने से पहले एक मजदूर को कुछ पैसे दे दिए जो मोहम्मद से कुछ उधार लिए थे और बोले कि जाओ तुम वह मोहम्मद साहूकार की पैसे चुका दो वरना तुम्हें वह बहुत तंग करेगा कर्जदार ने उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद दिया और वह तीनों साहूकार अपने शहर चल गए।

यह कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? कि लालच बुरी बला है। हमें अपने विवेक से काम करना चाहिए,ना कि किसी और के विवेक से काम करना चाहिए। यह कहानी से यही शिक्षा मिलती है, लालच बुरी बला है। जितना है उतने में ही रहो वरना, जो है वह भी चला जाता है यह कहानी की प्रेरणा है।