भोला-भाला महेश हिन्दी कहानी

भोला-भाला महेश हिन्दी कहानी

सुल्तानपुर गांव में एक महेश नाम का लड़का था। वह बहुत गरीब और उसके घर में उसके मां के सिवा और कोई ना था।

मां जब काम करते तभी उस घर में खाना पीना का व्यवस्था हो सकता था। परंतु 1 दिन उसकी मां बहुत बीमार हो गई। जिसके कारण वह काम पर ना जा सकी।
परंतु उसके घर में कोई भी ऐसा ना था, कि जो खाया जा सके मां बोली महेश को जाओ बेटा कहीं काम कर दो चार पैसे ले आओ,ताकि हम लोग कुछ खा सकें महेश बहुत ही भोला भाला लड़का था।

वह काम की तलाश में वाह बाजार की तरफ निकल पड़ा। तभी उसे एक किराने की दुकान में काम मिले महेश जब काम कर कर शाम को लौटने लगा तो दुकानदार ने ₹10 दिए महेश ₹10 लेकर अपने घर चला गया परंतु जब मां को पैसे देने के लिए हाथ फैलाता है, तो उसके हाथ से 10 का नोट भुला जाता है।

 यह देखकर मां बोली तुम जब भी काम करो बेटा तो अपनी कमाई जेब में रख कर लाना महेश बोलता है, ठीक है।
 दूसरे दिन महेश फिर काम की तलाश में निकल पड़ा तभी उसे एक चाय की दुकान दिखाई पड़ी उस चाय की दुकान में उसे काम मिल गया, और जब वह काम कर घर लौटने वाला था, तब चाय वाला उसे एक बोतल दूध दिया महेश जैसे ही दूध लेकर आने लगा तो उसे रास्ते में याद आया कि मां बोली थी, जब भी तुम काम करो अपनी कमाई जेब में रख कर लाना महेश दूध को अपने जेब में रख लेता है और मां के पास जाता है, मां समझ जाती है। 

फिर बोलती है, देखो बेटा अब तुम जब भी काम करो तो जो तुम्हें मिले वह तुम अपने कंधे पर रखकर लाना फिर क्या होगा। अगले दिन फिर महेश काम की तलाश में निकल पड़ा,वहां उसे एक कसाई की दुकान दिखाई पडी जिस दुकान में महेश को काम मिल गया, और शाम को वह घर आते समय दुकानदार ने उसे एक बकरी उपहार के स्वरुप में दिया। 

फिर महेश को अपनी मां की याद आई और वह बकरी को अपने कंधे पर लेकर आ रहा था। तो भी उसे देख कर एक बच्चा बहुत हंस रहा था। यह देखकर बच्चे के घर वाले घर से बाहर आए, और बोले महेश से की बताओ बेटा तुम कौन हो कहां से आए हो, महेश ने सारा बताया मैं सुल्तानपुर का निवासी हूं। मैं यहां काम की तलाश में बाजार आया था। उ

बच्चे की पिता गांव के मुखिया हुआ करते थे।मुखिया बोले देखो बेटा तुम्हें अब काम की तलाश में यहां-वहां भटकने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि तुम एक ऐसा काम किए हो जो कोई कर ना सका और बताया कि तुम जिसे हंसाए हो वह बहुत सालों से कभी उसके मुंह पर मुस्कान नहीं आई इसके कारण हम लोग बहुत परेशान थे।

 परंतु तुम परेशानी हल कर दी जाओ। महेश और अपनी परिवार को भी यहां ले आओ। मैं तुम्हें काम दूंगा महेश घर जाकर अपनी मां को भी साथ लाता है, और महेश एवं महेश की मां दोनों खुशी-खुशी काम कर अपना जीवन यापन करते हैं।