Four skill is English fluently approve.

मेरा नाम सत्यम शुक्ला है,और मैं बरेली के कैरियर टाइम कोचिंग का फाउंडर हूं ,मैं जिस घर में पैदा हुआ था,वह घर उस गांव का सबसे ज्यादा गरीब हर था ,और इस वजह से जो शुरुआत की स्कूल ही थी। वह I.c.s.c स्कूल में नहीं गया मैं उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ा बल्ला और 12 तक चीजें नॉर्मल स्कूल में पढ़ा था और पढ़ाई में मन लग रहा था इसलिए मैं 12 तक मैं उन ब्रिलियंट विद्यार्थियों में से एक हुआ करता था,मेरे पापा की सैलरी बहुत कम थी लेकिन उनके ख्वाब बहुत बड़े थे।



उनको लगता था कि जो चीजें अपनी लाइफ में नहीं कर पा सके वह उनका पुत्र करें इसलिए 12के बाद उन्होंने मुझे कहा कि सत्यम तुम्हें बी-टेक करना है मैंने कहा। बी-टेक मैं बहुत पैसे की आवश्यकता होती है 

पापा ने बोला यह चिंता मुझ पर छोड़ दो तुम अपनी जिम्मेदारी निभाओ और अच्छे से पढ़ाई करो और मेरा नाम रोशन करो और बड़े आदमी बनो मेरा एडमिशन उन्होंने लखनऊ के बी बी डी कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन से मैंने बी-टेक में मैंने एडमिशन लिया यहां तक मेरी लाइफ में कहीं ना कहीं सही जा रहा था लेकिन बी- टेक मैं एडमिशन लेने के बाद जो सच बताऊं तो यह मेरी लाइफ की पहली स्टेप शुरू होता है.

शायद जो मुझे अंदाजा भी नहीं था कि मेरी इतनी बड़ी कमजोरी भी है तू मैं वह कमजोरी का नाम एक शब्द में बताऊं तो वह था अंग्रेजी जी हां दोस्तों अभी तक किया था कि अंग्रेजी एक सब्जेक्ट हुआ करता था और उसमें कहीं न कहीं पासिंग अंक आ जाते थे लेकिन मैं जब बीटेक में गया तो यहां पर सारी की सारी सब्जेक्ट अंग्रेजी में ही था और तब मुझे अंदाजा हुआ कि मेरी अंग्रेजी वाकई में इतनी कमजोर है क्योंकि जब मैं किताब खोलता था तो मुझे कुछ समझ में नहीं आता था उसमें क्या लिखा है.

उसको पढ़ कर उसको अनुवाद नहीं कर पाता था इसके अलावा दूसरी चीजें में बताऊं तो प्रोफेसर भी अंग्रेजी में ही बोलते थे और हद तो तब हो गई जब हमारे वर्ग के बच्चे अंग्रेजी में कनवर सेट करते थे और मैं वहां डरा सहमा सा पीछे की सीट पर बैठता था"एक कुछ ऐसा हो गया था कि सीतापुर से कोई बच्चा सिंगापुर में भेज दिया गया" मेरे अंदर बहुत ज्यादा ग्रीन आ गई और मुझे लगता था कि जो एक टैलेंटेड अंग्रेजी मेरा पूरा का पूरा कॉन्फिडेंस जीरो पर लाकर सीमेंट दिया है और मैं जब कभी भी किताबे खोल रहा था मुझे सच में रोना आ रहा था मैं अपनी किस्मत पर रो रहा था कि मैं यहां क्यों आया पहली चीज और दूसरी चीज मैंने पापा इतने पैसे कहां से लाएं वह सरकारी कॉलेज में 4 ग्रेड के कर्मचारी है हमारी जॉइंट फैमिली है वह केवल एंप्लॉय पर्सन थे मेरे पापा मैं आज तक नहीं समझ पाया कि वह पैसे कहां से लाए। अब तो जा हालत हो गई थी कि मेरी मां फोन करती तो यही पूछती की बेटा पढ़ाई लिखाई कैसी चल रही है पहले वह फोन करती थी तो वह पूछती थी कि खाना खाया या नहीं लेकिन अब नहीं मैं समझ चुका था. 

किहीं ना कहीं बहुत कठिन सिचुएशन पर जाकर मुझे यह पैसे दिए जा रहे हैं और मैं क्या कर रहा हूं मैं बर्बाद ही तो कर रहा हूं जब मुझे कुछ ना समझ में आ रहा तो क्या करूं? और मैं उस समय बहुत ही ज्यादा डिप्रेशन सिचुएशन था मेरे अंदर से एक ख्याल आ रहा था सब कुछ छोड़ देते हैं यह एक लेबल पर था कि सुसाइड ही कर ले इस हद तक मैं सोचने लगा। फिर अंग्रेजी के कारण तब ए बात मेरे प्रोफेसर सर को पता चली तो वह मुझे बुलाकर मेरे कंधे पर हाथ राखी और मेरे अंदर की सारी बातें जानी और मुझे एक उपाय बताया कि देखो शक्तियों तुम एक काम करो मैंने बोला बताइए उन्होंने कहा कि तुम अंग्रेजी पेपर लो और उसे पढ़ो जिससे क्या होगा कि तुम्हें कुछ शब्द का पता ना चले इस लिए शब्दकोश रखो और पेपर पढ़ते समय जो सब तुम्हें मालूम ना हो वह सब एक डायरी में लिखो और तुम रोज सोने से पहले 50 शब्दअपनी डायरी में लिखो।

मैंने यह उपाय करना शुरू कर दिया अच्छा भी लग रहा था पर 30 दिन के बाद उससे मन उठ गया और मैंने अंग्रेजी पेपर लेना छोड़ दिया फिर वही मां की फोन जो मुझे यह एहसास हुआ कि मेरे पापा के सामने यह पेपर कुछ भी नहीं है और फिर पेपर लेना शुरू कर दिया और इसे लंबे समय तक 6 माह तक किया जिससे मुझे किताब की भाषा समझ में आने लगी और कोई बोले तो भी समझ लेता था पर मुझे बोलना था तो मैं वहीं सर के पास गया। प्रोफ़ेसर सर ने बताया कि देखो बेटा किसी भी भाषा कमांड हासिल करने के लिए चार स्किल होनी जरूरी है।

L. S.R.W. के नाम से जाना जाता है। (Listening, speaking, reading, writing) तुम्हारे अंदर लिखने और पढ़ने खूबी आ गई है अब तुम listening and speakingकी बात करें तो उसके लिए माहौल चाहिए एक ऐसा माहौल जिसमें तुम्हारे चारों तरफ अंग्रेजी  बोल रहे हो तो तुम भी कुछ ऐसे करो जो अंग्रेजी बोले और सुनो लेकिन मेन पॉइंट था कि मेरे दोस्त अंग्रेजी नहीं बोलते थे तो मुझे एक उपाय सूझा थोड़ा फनी है चाहे तो आप भी कर सकते हो मैंने दो तीन सिम खरीदी आइडिया वोडाफोन एयरटेल और हेल्प लाइन नंबर पर लगाकर उनसे घंटो बातें करता था जिससे मेरी अंग्रेजी की समस्या दूर हो गई और वह जो डर वह अब दूर हो गई।
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