पद

बसो मेरे नैने में नंदलाला।
मोर मुकुट मक्रकित,कुंडल , अरुण तिलक, दिए भाल।
मोस्नी मूर्त सवली सूरतनैना बने बिसाल।
उधर- सुधा- रस मुरली रजती उर बैजती माल।
छुद्र घंटिका कटि- तट सोभीत नूपुल सब्द रसाल।
मीरा प्रभु संतान सुखदाई भगत बछल गोपाल।


सूरदास
मैया मोहि दाऊ बहुत खीझाऊ।
मौसी कहत मोल को लिन्हो तू जसुमती कब जा।
कहा करो इती रस को मारे खेलन हों नही जात।
पुनी- पुनी कहे कोन है। माता को हैं तेरो तात।।
गोरे नंद यसोदा गोरी तु कत स्तमल गात।
चुटकी दे- दे  ग्वाल नचवावत हसत सबे मुसुकात।।
तू मोहि को मरत  सीखी दाउही कबू ना खींझे।।
सुन्हू कन्ह बल भद्र चावाई जनमत को ही धुत।
सुर श्याम मोहि घोधन की सो हौ माता, तू पुत।।