Sultan name ke bache ki khani(मसालेदार हिन्दी कहानी)

एक गांव में रामू नाम का व्यापारी रहा करता था ,वह बहुत अमीर भी था और उसके अलग-अलग जगह पर पांच कपड़े की दुकान था,पर वह हमेशा उदास रहा करता था, क्योंकि उसका कोई संतान ना था। और इसी कारण रामू गरीबों और साधु महात्माओं की सेवा भी करता था।

 इस कर्म का फल रामू को जल्द ही मिल गया उसके घर एक पुत्र जन्म हुआ जिसका नाम सुल्तान रखा साधु महात्मा को बुलाकर और साधु ने एक और बात बताई की तुम्हारा बेटा बहादुर तो है। पर उसका उम्र 16 का होगा तो उस पर बहुत बड़ा संकट आ सकता है रामू बोलता है। मेरा बेटा बहादुर तो है। ना वह खुद ही उस मुसीबत का सामना कर लेगा सुल्तान धीरे-धीरे बड़ा हो गया पर उसका मन अपने पिता के काम में नहीं लगता था। वह पूरा दिन खेलकूद में ही रहता था। जिसके कारण रामू का चिंता के मारे उसका तबीयत खराब हो गई ।और कुछ दिन बाद वह स्वर्गवास हो गया पर सुल्तान को कोई दुकान चलाने का उपाय ना था। जिसके कारण वह अपनी दुकान बंद कर दिया और उसके पास एक बड़ा घर में उसके मां और सुल्तान के अलावा और कोई भी नहीं था। पर कुछ दिन के बाद जब सुल्तान अपने कच्छ में सो रहा था। तब उसको एक सपना आया जिसमें एक साधु था वह बोला सुल्तान से कि तुम कल तिब्बत जागो वहां तुम्हारा भाग्य चमक उठेगा। यह बात सुल्तान अपनी मां से बोला मां बोली सपना कभी सच नहीं हुआ करता बेटा पर सुल्तान नहीं माना और तिब्बत की ओर प्रस्थान कर दिया जाते-जाते सुल्तान थक गया था। जिसके कारण उसे आराम करते करते नींद आ गई। फिर से उसे वही साधु सपने में आया और बोला बेटा अब तुम्हारा भाग्य समझ चुका है। अब तुम घर जाओ सुल्तान अपने आपको सोचने लगा कि मैं यहां झूठी सपना पर यकीन क्यों किया अच्छा करता अगर मैं मां की बात मान लेता सुल्तान घर गया। और मां को सारी बात बताया मां ने बोला कोई बात नहीं बेटा जाओ तुम थक गए होंगे। आराम कर लो वह आराम करने गया तो उसे फिर उससे वही साधु सपने में आया और बोला बेटा तुम उस कमरे की खुदाई करना जिसमें कमरे में तुम्हारे पिता आराम करते थे। वह तुम्हें कुछ ऐसी चीजें मिलेगी जो तुम देख कर हैरान हो जाओगे यह अपनी मां को जाकर बताया मां बोली बेटा से बस जाने से तो अच्छा है। कि तुम मेरे पास ही रहो तुम्हारी तसल्ली के लिए जाओ और अपनी शक मिटाओ सुल्तान कमरे की खुदाई करना शुरू कर दिया ,उसे अपनी मूर्खता पर रोना आया तभी उसे एक बड़ा सा पत्थर दिखाइए पड़ा वह अपनी मां को बुलाया और पत्थर के पीछे एक गुफा था। उस उस गुफा मैं जाने लगे तो उसमें बहुत सारी धन और सोने-चांदी था।

पर कुछ समय बाद सुल्तान को 8 सोने की मूर्ति दिखाई पड़ी सारी मूर्ति सोने की थाली में खड़े थे ,पर उसमें एक प्लेट खाली था सुल्तान उस प्लेट को उठाया तो उस पर लिखा था,कि अगर तुम यह मूर्ति हासिल करना चाहते हो, तो तुम्हें अजमेर जाना होगा और तुम्हें वहां अब्दुल्ला नाम का एक व्यापारी मिलेगा उसे तुम सारी बात बताओगे, तो तुम्हें वह तुम्हारे मदद अवश्य करेगा यह बात मां सुनकर बोली जपो बेटा तुम्हारे ईश्वर की मर्जी है सुल्तान निकल पड़ा हुआ अब्दुल्ला नाम की व्यक्ति से मिला और बात बताया अब्दुल्लाह उसकी मदद करने के लिए वह उसे एक राक्षस के गुफा के पास ले गया ,और वहां अपनी चारों ओर जादुई घेरा बनाया अब्दुल्ला उस राक्षस को बुलाया और राक्षस से सुल्तान आठवीं मूर्ति की मांग किया राक्षस कहा ठीक है।

पर तुम्हें हमारी शर्त माननी पड़ेगी सुल्तान मानने को तैयार था राक्षस ने कहा तुम्हें एक सुंदर और दयालु कन्या को हमारे पास लाना होगा जिससे मैं विवाह करूंगा और सुल्तान को एक जादुई दर्पण दिया जिससे वह पता लगा सके कि दयालु है कि नहीं यह काम सुल्तान को बहुत कठिन लगी वह अब्दुल्ला के यहां जाकर उस दर्पण को एक स्थान पर रख दिया 2 दिन के बाद दर्पण हंसने लगा वह हंसी सुनकर सुल्तान वहां पहुंचा तो देखा नौकरानी की बेटी उस दर्पण किस साफ कर रही थी। उस दिन नौकर बीमार था यह देखकर सुल्तान खुश हुआ ,और सारी बात उस कन्या को बताया कन्या मान गई पर सुल्तान को अच्छा नहीं लगा अपने स्वार्थ के लिए किसी की बल्ली अब्दुल्लाह उसे समझाया और उस राक्षस के पास जाकर उस कन्या को दिया पर अब्दुल्लाह मायूस हो कर घर पर लौटा और मां को सारी बात बताया मां बोली उस मूर्ति को देखकर कन्या को छुड़ा लेंगे बेटा। सुल्तान को यह बात अच्छी लगी और देखने गया कि राक्षस ने अपनी शर्त पूरी की कि नहीं वहां गया।
तो उसे वही कन्या दिखाई पड़ी और वह राक्षस वहां आकर बोला मैं राक्षस नहीं था। तुम्हारे सपने का साधु था मैंने भी तुम्हारी पिता की मदद की थी। और बोला तुम इस कन्या से विवाह कर अच्छा जिंदगी बिताना सब तुम्हारा है।