पिछड़ी जारी के लिए नए कानून

पिछड़ी जारी के लिए नए कानून

भारत सरकार ने चिल्लाती में सुधार लाने के लिए नए कानून के अंतर्गत अध्यादेश जारी किया। जिसमें शिक्षा संस्थान एवं अन्य विभागों में आरक्षण प्रदान किया। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के समान शिक्षा तथा शोध कार्य हेतु ले जाने वाले छात्रों को स्कॉलरशिप देने का विधान बनाया तकनीकी तथा गैर तकनीकी विद्यालयों में आरक्षण दिया। कक्षा 6 से लेकर 12 तक के छात्रों को छात्रवृत्ति देने का नियम बनाया।


अनुसूचित जाति एवं जनजाति पर होने वाले अत्याचारों के निवारण हेतु कानून 


अनुसूचित जाति एवं जनजाति पर होने वाले अत्याचारों के निवारण हेतु कानून

धारा 3 के अंतर्गत अनुसूचित जाति अथवा जनजाति को निम्नलिखित तथ्यों में से किसी भी प्रकार बिछड़े करने वाले व्यक्ति दोषी माना जाएगा-
1।  अनुसूचित जाति अथवा जनजाति की भूमि पर जबरजस्ती अधिकार करना।
2। अनुसूचित जाति अथवा जनजाति को प्रताड़ित करना।
3।  अनुसूचित जाति अथवा जनजाति को किसी मंदिर अथवा सभागृह में जाने से रोकना।
4। अपशब्द कहना गाली देना या फटकार ना
5। अनुसूचित जाति जनजाति को ना खाने योग्य पदार्थ बलपूर्वक दिखाना।
  6।  उसके वस्त्र उतार लेना।
7।  यदि अनुसूचित व्यक्ति मतदान करने जा रहा है उसे डरा धमका कर अपने पक्ष में करने का प्रयास करना
8। अनुसूचित जाति अथवा जनजाति की स्त्री का अनादर करना।
9। अनुसूचित व्यक्तियों को गांव से जबरन निकाल देना आदि कानून की धारा के अंतर्गत दंडित अपराध है अपराध सिद्ध होने पर वक्त व्यक्ति को 6 माह से लेकर 5 वर्ष की सजा हो सकती है।


नारी अधिकार संबंधित कानून--

भारत सरकार ने नए कानून के अंतर्गत मार्गो को विशेष सुविधाएं प्रदान की है। उन्हें अधिकार दिए हैं। जो निम्नलिखित है--
1। विवाहित स्त्रियों के बीमा कराने का प्रावधान है।
2। भारतीय स्त्री यदि किसी ऑफिस अथवा सरकारी कार्यालय में कर्मचारी है वह गर्भवती है बच्चा पैदा होने के समय उसे विशेष छुट्टियां मिलती है।
3। नारी को वसीयत करने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
4। यदि किसी विवाहित स्त्री को उसका पति तलाक दे देता है। अथवा उसके भरण पोषण का ध्यान पति नहीं रखता। तो उस स्त्री को यह अधिकार है। कि अदालत में नोटिस दे। हर विवाहित स्त्रियों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति को ही होती है।