एक और ताज



दुनिया में सात अजूबों में ऐसा अजूबा जिन्हें देखकर हर कोई यह सोचने को मजबूर हो जाता है। किं उन्हें बताया कैसे गया होगा शाहजहां द्वारा अपने प्रिय बेगम मुमताज की याद में आगरा को बनवाया गया ताजमहल भी इन्हें अजूबों में एक है। इतिहासकारों के अनुसार ताजमहल को 20000 कारीगर ने रात दिन मेहनत करके 23 साल में पूरा किया था। यह बात सच है या झूठ इस बारे में तो कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन लोग कहते हैं। कि ताजमहल बनने के बाद शाहजहां ने उन कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे। जिन्होंने ताजमहल बनाया था। ऐसा इसलिए किया गया था जिससे वह ताजमहल जैसी या उससे बेहतर दूसरे इमारत ना बना सके।
    शाहजहां के बाद कितने भी लोगों ने शाहजहां जैसी अनुकृति बनवाने के प्रयास किए लेकिन दुनिया के इस अजूबे जैसी इमारत बनाना असंभव ही रहा।
    जब ताजमहल का निर्माण हुआ तब साधनों का अभाव था। लेकिन अब जबकि इमारतें बनाने के एक से एक उन्नत और बेहतर साधन मौजूद है तो पैसे कारीगर नहीं है। जैसे शाहजहां के जमाने में थे बावजूद इसके मोहाली पंजाब के मूल निवास एसबी सिंह ओबरॉय ने 4000000 अमेरिकन डॉलर खर्च करके दुर्बल ग्लोबल विलेज की चार लाख वर्ग फीट हजार में हु-ब-हु ताजमहल की आकृति बनवाई है इस अनुकृति के लिए कारीगर भले ही मुंबई और आगरा से तथा सफेद संगमरमर जयपुर से मंगवाया गया पर इसके निर्माण में आधुनिक निर्माण प्रौद्योगिकी का ही इस्तेमाल किया गया जिसकी वजह से यह 600 श्रमिकों 270 मीनार कारी करने वाले कार्य गुरु की सेवाएं लेकर मात्र 3 महीने में बनकर तैयार हो गया।
     दुबई के ग्रेड होटल में बनी ताजमहल की इस अनुकृति का निर्माण कार्य 26 अक्टूबर को शुरू हुआ था और अब इसका लोका प्राण होने जा रहा है जिसे अंजाम देगा दुबई का शाही परिवार उद्घाटन और लोकपरन काया काम फरवरी में ही हो जाएगा।
     दुबई स्थित ग्रैंड होटल के चेयरमैन एस पी ओपेराय सभी का करते हैं कि आगरा स्थित ताजमहल शाहजहां और मुमताज के प्रेम की हमारी निशानियां है उन्होंने तो इस अद्भुत आठवें अजूबे की प्रतीक मात्र अनुकृति बनवाई है लेकिन यह जरूर है कि हमने यह प्रयास पूरी इमानदारी से किया वह भी इस बात का ख्याल करते हुए की मूल ताजमहल से जुड़ी प्रेमील भावनाओं को जरा सी भी खरोच ना लगे होटल व्यवसाय कोबे राय के इस ताजमहल को देखने के लिए टिकट लगेगा लेकिन विकलांग लोग ऐसे बनी किसी खर्च के देख सकेंगे विकलांग को और बुजुर्गों के लिए ओबेज राय ने विशेष रैंप बनवाया है 300 मीटर लंबे इस प्रांत में व्हेल चरयसी की व्यवस्था की गई है जिससे अपंग और बुजुर्ग को इसे देखने में कोई परेशानी ना हो एसपी ओबेज राय के माता पिता मोहाली चंडीगढ़ में रहते हैं और बेटे द्वारा बनाए गए ताजमहल के उद्घाटन के अवसर पर दुबई गाते थे। पर असंम्भव रहा था।