Khusbu rachte hai hath

खुशबू रचते हैं हाथ। (Khusbu rachte hai hath)

कई गलियों के बीच
कई नालों के पार
कूड़े-कचरे
के ढेरों के बाद
बदबू से फटते जाते
चोली के अंदर
 खुशबू रचते हैं हाथ।
खुशबू रचते हैं हाथ।
उभरे नसों वाले ‌हाथ
पी से नाखूनों वाले हाथ
पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ
जूही की दाल से खुशबूदार हाथ।
गंदे कटे फटे हाथ।
जख्म से कटे हुए हाथ
खुशबू रचते हैं हाथ।
खुशबू रचते हैं हाथ।
यही इस गली से बनती है।
मुल्क की माशूर अगर बतियां
इन्हीं गंदे महलों से गंदी लोग
बनाते हैं केवाड़ गुलाब, खास और रातरानी 
अगर बतियां।
दुनिया के सारी गंदगी के बीच
दुनिया की सारी खुशबू
रचते रहते हैं हाथ।
खुशबू रचते हैं हाथ।
खुशबू रचते हैं हाथ।