दहेज विरोधी अधिनियम--
दहेज विरोधी अधिनियम--

दहेज लेना और देना कानून की नजर में दोनों राधे कानून ही नहीं समाज के लिए दहेज एक कोढ़ है। इस बढ़ावा देना समझ के साथ अन्याय करना है। इसे देश और समाज दोनों का अहित है। दहेज वृत्ति लागू किया किसके अनुसार--
वर पक्ष द्वारा दहेज की मांग कर अथवा वधू पक्ष द्वारा दे दिया जाना दोनों सिमली था अपराध सिद्ध होने पर ₹5000 का जुर्माना अथवा 5 वर्ष की सजा मजिस्ट्रेट आदि उचित समझाता है। वह दो प्रकार की सदस्यता है इसे पूर्ण अधिकार प्राप्त है। ले के लिए यदि वर पक्ष व्यक्ति वधु को प्रताड़ित करते हैं। तो धारा 498 के तहत दंडनीय होंगे या धारा और पक्ष के उन रिश्तेदारों अथवा संबंध न्यू पर भी लागू होती है। जो स्त्री के पति को क्रूरता पूर्व कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। जिससे वह नवविवाहिता स्त्री आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाए। अथवा उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाए मूल्यवान वस्तु की मांग करने का अपराध सिद्ध होने पर 3 वर्ष तक की सजा हो जाती है। विवाह तिथि के 7 वर्ष के अंदर यदि स्त्री आत्महत्या कर लेती है। तो उसे पति और परिवार वालों को दोषी माना जाएगा।

बाल विवाह विरोधी कानून--
बाल विवाह विरोधी कानून--

पूर्वकाल सही भारत देश में बाल विवाह की प्रथा चली आ रही है। बाल विवाह करना एक मूर्खतापूर्ण कदम है। विवाह का मतलब होता है। कि जिन दो प्राणियों का विवाह हो रहा है। वे एक दूसरे के विचारों को भावनाओं की अच्छी तरह समझ सके पति पत्नी से क्या चाहता है। और पत्नी पति से क्या चाहती है। विवाह के लिए उम्र की परिपक्वता आवश्यक है। इसके लिए सरकार ने आयु सीमा निर्धारित की।
     कानूनी तौर पर लड़के की आयु 21 वर्ष और लड़की की आयु 18 वर्ष होना आवश्यक है। यदि निर्धारित आयु से कम अवस्था पर कोई व्यक्ति अपने लड़के अद्व लड़की का विवाह कर रहा है। दुआ अपराधी माना जाए यदि कोई व्यक्ति अधिक उम्र 1 वर्ष से ज्यादा का हो और 18 वर्ष से कम उम्र वाली लड़की से विवाह कर रहा है। उसे 3 वर्ष की सजा हो सकती है। और जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है।

बंधुआ मजदूर या बल श्रम अधिनियम--

इस नए कानून के अंतर्गत यदि कोई बालक श्रम करें अथवा इसके माता-पिता को पैसा देकर कोई व्यक्ति उस बालक को खरीद ले ऐसे को बंधुआ मजदूर कहते हैं। बंधुआ मजदूरी की प्रथा को रोकने के लिए सरकार ने कानून पारित किया जो बालश्रम कराने वाले व्यक्ति पर लागू होता है। उसे 3 की कह दिया ₹1000 का जुर्माना का जॉइंट किया जा सकता है। अथवा दोनों सजाएं।

विवाह एवं तलाक अधिनियम
     मुस्लिम तलाक की निम्नलिखित शर्त-

विवाह की शर्तें--
1। यदि वह व्यक्ति जो विवाह करना चाहता है विधुर हो अर्थात उसकी पत्नी मर चुकी हो।
2। जिससे विवाह कर रहा है उस स्त्री का पति मर चुका हूं विवाह करने की अनुमति कानून देगा।

तलाक की शर्तें--

1। हिंदू रीति रिवाज के अनुसार विवाह होने के बाद पति-पत्नी एक दूसरे से दूर दूर रहते हो।
2। निर्दयता पूर्ण व्यवहार हो अर्थात एक दूसरे को पसंद करते हो।
3। स्त्री या पुरुष से किसी का शारीरिक संबंध किसी तीसरे से हो।
4। स्त्री अथवा पुरुष में से कोई दिमागी रूप से पागल हो।
5। पति-पत्नी में से कोई अपना धर्म छोड़कर अन्य धर्म अपनाना चाहता हो।
             तलाक होना संभव है।

मुस्लिम तलाक कानून--

मुस्लिम विवाह में एक पुरुष को चार विवाह करने का अधिकार मुस्लिम धर्म के अनुसार प्राप्त है। विवाह के समय जिस स्त्री से विवाह हो रहा हो। उसकी सहमति अनिवार्य है। अर्थात जब तक वह नहीं कहते  कि मुझे शादी मंजूर है। तब तक विवाह माननीय नहीं होता--
       मुस्लिम तलाक की निम्नलिखित शर्त---
1)यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी का खर्च कम से कम 2 वर्ष से सहन ना कर सकता हैं।
2) जिस स्त्री का पति सजायाफ्ता मुजरिम रह चुका हो।
3) पति कई वर्ष से लापता हो। ऐसी स्थिति में स्त्री दूसरी शादी कर सकती है।
 पति द्वारा तलाक दिया जाना--
1। नशे की स्थिति में दिया गया तलाक।
2। पति के क्रोध में आकर तलाक देना।
3। किसी मजबूरी के कारण भी तलाक होता है।