नए नए कानून

हम सब आजाद भारत के आजाद नागरिक हैं। अपनी सरकार और कानून है। आजादी प्राप्त करने के पश्चात डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में कुछ प्रमुख नेताओं एवं विद्वानों ने मिलकर विधान का गठन किया है। जिसे भारतीय संविधान कहते हैं। भारतीय संविधान में देश की प्रगति एवं मानव विकार पूर्ण रूप से किंतु उन अधिकार एवं कानून की राव का ज्ञान का को नहीं है। जयपुर ग्रामीण इलाके के व्यक्तिगत विज्ञान की परिधि में परे हैं। सर्वेक्षण करने से यह ज्ञान होता है। कि कानून की धाराओं से वे अनभिज्ञ हैं बहुत कम ज्ञान है। जिस कारण कोई अदालती कार्य पड़ जाने पर सीधा वकीलों की सर में जाना हो। तन उनकी अज्ञानता के कारण है। अच्छी तरह अदालती चक्कर काटना पड़ता है। मेरे लिखने का तात्पर्य किसी विभाग को बदनाम करना नहीं बल्कि आम जनता को आगाह करना है। कि भारतीय संविधान में संशोधन करके कुछ नए कानून पारित हुए हैं। यदि नए कानून का ज्ञान आम जनता को हो। तो उन्हें स्वयं अपने लिए बहुलता होगी बेचैनियां बात यह है। कि कानून की मोटी मोटी पुस्तकों का अध्ययन सामान्य नागरिक तो कर नहीं सकता किंतु कुछ कानून ऐसे हैं। जिनका ज्ञान होता है दैनिक जीवन के लिए अति आवश्यक है। इस छोटी सी पुस्तक के माध्यम से हम अपने देश की जनता को यह संदेश देना चाहते हैं। कि इसे पढ़कर आप ज्ञान अर्जित करके और दैनिक जीवन में उपस्थित होने वाली कठिनाइयों का जो कानून समस्याओं से संबंध रखती है। के विषय में स्वयं निर्णय ले सकेंगे कि हमें क्या करना है।
         इस ब्लॉक को लिखने का एकमात्र उद्देश्य यही है। कि इसे पढ़कर आम जनता भावित हो।
       जनहित में प्रकाशित!

                     नए कानून क्या है?

आम जनता में यह धारणा बन चुकी है। कि यदि मैं किसी प्रकार का गुनाह अथवा अपराध करूंगा। तभी मुझे पर कानून लागू होगा उनके सोच की अवधारणा गलत है। कभी-कभी ऐसा कार्य भी हो जाते हैं। जिसे हम गुनाह नहीं समझते किंतु कानून की नजर में गुनाह होता है। एक पुस्तक में मैंने पढ़ा एक आदमी बीच सड़क पर छड़ी घुमाते हुए जा रहा था। उसे ऐसा करते देख कर एक दूसरे आदमी ने उसे रोकते हुए कहा भाई साहब यह आप क्या कर रहे हैं। या अपराध है। उस समय उसने कहा मैं कुछ भी करूं तुम्हें क्या मतलब हम आजाद देश के आजाद नागरिक हैं।
      यह सत्य है कि हमारा देश आजाद है। और आजाद देश के हम आजाद सभी आजाद नागरिक है। दूसरे शब्दों में अंग्रेजी की गुलामी से आजाद हुए हमें 50 वर्ष से ज्यादा हो गए। किंतु आजाद होने का मतलब यह तो नहीं कि हम ऐसा कार्य करें जिससे दूसरों को तकलीफ हो इन्हीं कारणों को मध्य नजर रखते हुए। कानून का निर्माण हुआ और कार्य के अनुसार अपराधियों का निरूपण हुआ। तथा उसके लिए कानून लागू किए गए और समय-समय पर संशोधन भी होता रहा।

मानवाधिकारों की सीमा का निर्धारण वाले आयोग

भारतीय संविधान के अनुसार मानव अधिकार दो प्रकार के होते हैं-
1) राष्ट्रीय मानव अधिकार।
2) मानव अधिकार।
  राष्ट्र माला अधिकार के अंतर्गत एक आयोग का गठन होता है जिनमें एक अध्यक्ष एवं 7 सदस्य होते हैं।अध्यक्ष पद पर उस व्यक्ति का नियुक्ति होती है। जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश के पद पर कार्य कर चुके हो। इसके अलावा 7 सदस्य का निर्धारण किस प्रकार होता है।
  1. उच्च न्यायालय में कार्यकर्ता अथवा रिटायर जज।
  2.  उच्चतम न्यायालय में कार्य अथवा रिटायर जज।
  3. 7 सदस्यों में से 2 सदस्य ऐसे व्यक्ति होंगे जो मानव अधिकारों के विषय में समुचित ज्ञान रखते हो।
  4. अल्पसंख्यक अनुसूचित जाति जनजाति तथा राष्ट्रीय महिला आयोग के अध्यक्ष के रूप में तीन व्यक्ति होंगे।
       कानून वेताओ ने अपराध के अनुसार कानून की धाराओं का निर्धारण किया कोई सा अपराध किस धारा के अंतर्गत है तथा उसके लिए दंड क्या है?