मकान संबंधित कानून
मकान संबंधित कानून

मकान संबंधित कानून शहर एवं कस्बों में लागू होता है। जहां पर नगर पालिका विकास परिषद नगर निगम प्रचलित होता है। शिक्षा स्थान अथवा धर्मार्थ स्थलों पर अर्थात मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा और चर्चा दी पर यह लागू नहीं होता। जो शिक्षा संस्थान एवं धर्मार्थ संस्था औद्योगिक संस्थाएं चला रही है। तथा किराएदार को यह अधिकार है। कि यदि उस मकान का स्वीकार अधिक किराए की मांग करता है तो वह संस्था अदालत में जाकर अपील करें कि उक्त मकान का स्वामी अधिकार किराए की मांग कर रहा है।


मकान का एलॉटमेंट कराने के संबंध में

 मकान का एलॉटमेंट कराने के संबंध में

इस नए कानून के अनुसार मकान मालिक के रूप में या किराएदार के रूप में उस मकान में रहने वाले किसी दूसरे आदमी को बिना एलॉटमेंट ऑर्डर के 30 माह से अधिक समय के लिए पूर्ण रूप से अस्थाई आवास की इजाजत दे सकता है।

मजिस्ट्रेट के आदेश के बगैर मकान का स्वामी उस अवधि को छह माह तक के लिए बढ़ा सकता।

यदि मकान मालिक और किराएदार अपना सामान मकान से बाहर निकाल ले और अपने स्थान पर किसी अन्य को रख दे। और स्वयं दूसरे मकान में स्थाई रूप से रहने लगे और गैर रिहायशी किराएदार कारोबारी मामले में समझौता कर किसी अन्य व्यक्ति को अपने साथ रख ले। तो उससे परिवार का सदस्य ना हो ऐसी स्थिति में मकान खाली कराया जा सकता है।

प्रत्येक मकान मालिक के लिए या आदेश है। कि किराएदार द्वारा खाली किए गए मकान की सूचना 7 दिन के अंदर मजिस्ट्रेट को दें।

मकान खाली होने की दशा में मजिस्ट्रेट उस मकान को मकान मालिक के हक में कर लेगा अथवा अलर्ट  कर देगा।


बेदखली कानून

बेदखली कानून

1)बेदखली शब्द ऐसा है। जिसे सुनकर किसी प्रकार के अहित होने का विचार मन में उभरता है। या काफी चर्चित विषय रहा है। किरायेदारों मकान मालिक किन कारणों से बेदखल कर सकता है।
2) धरने शमा से भवन किराया नादया किया हो 1 माह पूर्व भवन स्वामी मिल गया हो। फिर भी किराएदार ने भवन किराया ना किया हो।
3) युद्ध में शहीद हुए सैनिक आश्रित की विधवा स्त्री एवं उसके बच्चे के लिए 1 वर्ष की अवधि निर्धारित की गई है
यदि किराएदार मकान मालिक की इजाजत के बिना मकान में किसी प्रकार का निर्माण कार्य करता या मकान को क्षति पहुंचाता हो।
4) यदि किराएदार ने जिस उद्देश्य से मकान किराए पर लिया है उसके अलावा भवन स्वामी की अनुमति के घर को अन्य कार्यकर्ता ऐसी स्थिति में भगवत स्वामी किराएदार को बेदखल कर सका है। ऐसा पूर्ण अधिकार है।
5) यदि किराएदार भवन स्वामी का भवन पर स्वामित्व माननीय से करें।
6) किराएदार अवधि तक अदालत में मुकदमा लड़ने का अधिकार नहीं रखता। जब तक की आय की बकाया धनराशि अदालत में जमा ना कर दे।
7) किराएदार उस शहर में अपना स्वयं का मकान बना लिया है। तो उसे कानूनी तौर पर किराए के मकान से समझा जाएगा।


मकान मालिक के लिए कानून

यदि मकान जर्ज हो गया है। अथवा मकान मालिक उस मकान के निर्माण कराना चाहता है। ऐसी स्थिति में धारा एक 21 के अंतर्गत किराएदार से उस वक्त मकान को खाली करा सकता है।
कानून के अनुसार ऐसा मकान जिसमें किराएदार रह रहा हो यदि व्यक्ति ने अपने लिए खरीद लिया हो ऐसी स्थिति में कानून मालिक को यह अधिकार नहीं होता कि वह मकान खाली करवा सके जबकि मकान को बिके हुए 3 वर्ष पूरे नहीं होते तथा नए मकान मालिक द्वारा किराएदार को मकान खाली करने के लिए 5 माह पूर्व नोटिस न दिया गया तो ऐसी परिस्थिति में बेदखली होता है धवन का स्वामी किराएदार को 2 वर्ष तक का किराया हर्जाने के रूप में अदा करेगा जिसका निर्धारण अदालत करेगी।
      यदि भवन का स्वामी किसी व्यवसायिक परियोजना के लिए भवन किराए पर देता है अथवा किराएदार के परिवार के सदस्य की संख्या के अनुसार किराए पर देता है तो ऐसी स्थिति में बिजली के नियम---
1। यदि किराएदार के बच्चे नाबालिक था बाद में कोई एक बालिक हो जाता है। उसका शादी हो जाती है और उसके भी बच्चे हो जाए। ऐसी स्थिति में उसकी आवश्यकता को देखते हुए उस पर विचार किया जा सकता है।
2।  यदि किराए पर दिए गए भवन के अलावा भवन स्वामी के परिवार के सदस्य की संख्या और उसकी अलग-अलग आए तथा सामाजिक सतह को देखते हुए अन्य कोई स्थान ना हो तो भवन स्वामी की स्थिति पर उदारता पूर्ण विचार किया जाएगा।
3। यदि किराएदार की आवश्यकता की पूर्ति किराएदार के भवन के एक भाग से हो जाती है। और मकान मालिक के आवश्यकता की पूर्ति मकान के शेष भाग्य से हो सकती है। तब अदालत मकान के शेष भाग का निर्णय मकान मालिक के पक्ष में दे सकती है।
4।  यदि काय किराएदार के अलग-अलग अध्यापन के लिए किराए मकान का पूरा एक ब्लॉक हो तथा मकान का स्वामी अपनी निजी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किराएदार को निकालना चाहता हो तो ऐसी स्थिति में अदालत या देखेगी की क्या किराएदार के रहने के लिए दूसरा मकान उपलब्ध हो सकता है।
5।  यदि कोई मकान किसी ने कारोबार करने हेतु किराए पर लिया है। और रायदार उस स्थान पर अधिक दिन से अपना कारोबार चला रहा हो। ऐसी स्थिति में किराएदार को बेदखल करने हेतु मकान मालिक द्वारा किए गए आवेदन पत्र पर उतना ही कम विचार किया जाएगा।
6। यदि किराएदार के पास कारोबार है। तो अपना कोई निजी अस्थान हो जिसमें वह कारोबार चला सके मकान मालिक अदालत में बेदखली का आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है।
7। यदि मकान मालिक मकान को गिरा कर नए सिरे से बनवाने का इच्छुक है। और उसमें स्वयं निवास करना चाहता हो तो धारा 22 के तगत जिला जज की अदालत में आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकता है आवेदन करने का शुल्क ₹10 निर्धारित है।
8।  अपनी निजी और सकता हूं। अथवा किसी संबंधित के लिए यदि किसी मकान का स्वामी किराएदार से मकान खाली कर आता है। और मकान का उपयोग नहीं करता ऐसी स्थिति में पुराना किराएदार मकान मालिक के विरूद्ध अदालत में आवेदन पर प्रस्तुत करके पुनः मकान किराए पर प्राप्त कर सकता है।