बकरी एवं मुर्गी पालन

बकरी और मुर्गी पालन के लिए बैंक लोन देती है बकरी की एक यूनिट के चार बकरी एवं एक बकरा होगा एक व्यक्ति को 2 यूनिट से अधिक नहीं दी जाएगी।
बकरी एवं मुर्गी पालन

जुआ विरोधी कानून

यदि कोई व्यक्ति जुआ का अड्डा चलाता है तो वह धारा 13/4के अंतर्गत आता है पकड़े जाने पर ₹1000 जुर्माना और 1 वर्ष की सजा दी जाती है और जो आदमी जुआ खेलता है हुआ गिरफ्तार होगा उस पर भी उपरोक्त सजा लागू होगी।

भ्रष्टाचार विरोधी कानून
सरकार कर्मचारी यदि कोई किसी व्यक्ति से गैरकानूनी तरीके से रकम लेता है तो वह रिश्वत माना जाएगा रिश्वत लेने का अपराध सिद्ध होने पर 3 वर्ष की सजा एवं जुर्माना दोनों हो सकता है जो नए कानून की धारा 161, 162, 163 के अंतर्गत आता है कर्मचारी निलंबित भी किया जा सकता है यह कानून 9 सितंबर 1998 से लागू हुआ।


खाद्य वस्तुओं में मिलावट विरोधी कानून

जो व्यापारी खाद्य वस्तुओं में मिलावट करके बेचता है जैसे दूध घी मक्खन दाल आटा मिठाई पिसे हुए मसाले मिठाई आदि वह व्यापारी कानून की धारा 203, 212 के अंतर्गत दंडित होगा ऐसे व्यक्ति का अपराध सिद्ध होने पर छह माह की सजा मामा शक्ति एवं ₹5000 का जुर्माना किया जा सकता है स्वास्थ्य विभाग अधिकारी मिलावटी वस्तुओं को जप्त करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है।
भारतीय दंड संहिता में हुए संशोधन


भारतीय दंड संहिता में हुए संशोधन

1।  यदि कोई व्यक्ति फांसी लगाकर अथवा किसी जहरीली वस्तु का सेवन कर आत्महत्या करने का प्रयास करता है तो वह व्यक्ति दफा 309 के अंतर्गत दंडित होगा उसे 1 वर्ष की सजा हो सकती है।
2। जो व्यक्ति दूसरे धर्म के निंदा धर्म स्थल जैसे मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा अथवा चर्च को अपवित्र करने का प्रयास करता है हुआ धारा 294 के अंतर्गत अपराधी माना जाएगा उसे 2 वर्ष की सजा हो सकती है।
3। पुलिस विभाग को गलत सूचना देने वाले व्यक्तियों को दफा 177 के अंतर्गत अपराधी माना जाएगा 6 माह की सजा होने का प्रावधान है।
4। सरकारी कार्यों में अवरोध उत्पन्न करने वाले व्यक्तियों को ₹5000 जुर्माना अथवा 3 माह की कैद हो सकती है।
5। औरतों के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले व्यक्तियों अथवा झांसे देकर उसे इज्जत लूटने वाले व्यक्ति पर दफा 493 लागू होता है ऐसे व्यक्तियों का अपराध सिद्ध होने पर 10 वर्ष की सख्त सजा होने का कानून है।
6। अपनी स्त्री को प्रताड़ित करना अथवा दहेज लेने के लिए मजबूर करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध औरत यदि चाहे तो थाने में जाकर रिपोर्ट दर्ज कर सकती है ऐसे व्यक्तियों को दफा 488 के अंतर्गत सख्त कार्यवाही की जाएगी।


संपत्ति पर औरत का अधिकार

भारतीय संविधान के अनुसार पूर्व से संपत्ति का अधिकारी होता है किंतु कानून में संशोधन होने के पश्चात स्त्रियों को उस संपत्ति का भागीदारी माना जाता है उदाहरण स्वरूप यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन बेचना चाहता है तो बिना पत्नी की रजामंदी के नहीं बेच सकता।
संपत्ति पर औरत का अधिकार


अपराध और उन पर लागू होने वाला धारा

चोर डाकू अथवा समाजिक तत्व को शरण देने पर वह व्यक्ति धारा 216 का अपराधी माना जाएगा।
बलबा करने अथवा कराने वाले व्यक्तियों धारा 147 के तहत अपराधी होता है।
अदालत को झूठी गवाही देने वाला व्यक्ति धारा 191 का अपराधी होता है।
भारतीय करोसी को जाली अपने का कार्य करने वाले व्यक्तियों को धारा 232 का अपराधी माना जाएगा।
खाद्य पदार्थ में मिलावट करने वाले अपराध है ऐसे व्यक्तियों पर धारा 272 लागू होती है।
गलत बांटो को उपयोग में लाकर कम टॉर्च करने वाले व्यक्तियों पर धारा 267 का अपराधी है।
जाली दवाओं का उत्पादन करना जघन्य अपराध है इससे संपूर्ण मानव जाति का सहित है ऐसे व्यक्ति धारा 274 की अपराधी माने जाएंगे।
जाली और मिलावटी दवाओं की बिक्री करने वाले पर धारा 275 लागू है।
असलिल साहित्य का व्यापार करने वाले व्यक्ति धारा 292 के अंतर्गत अपराधी माने जाएंगे।
किसी को मारने के उद्देश्य से अथवा घायल करने के उद्देश्य से यदि कोई आक्रमण करता है तो वह धारा 323 का अपराधी होगा।
आत्महत्या का प्रयास धारा 309 के अंतर्गत आता है।
किसी स्त्री को जबरन भगा कर ले जाना कानून जुर्म है वह व्यक्ति धारा 363 का अपराधी है।
औरतों से बलात्कार करना संगीन  अपराध है। ऐसे कुकुत्व करने वाले व्यक्ति पर धारा 376 लागू होती है।
नाबालिक लड़कियों को भगाकर ले जाना धारा 366 के अंतर्गत अपराध माना जाता है ऐसे व्यक्तियों के साथ कानून सख्त से पेश आता है।
किसी के घर में सेंड लगाने वाला धारा 446 के अंतर्गत अपराधी है और चोरी करने वाला एवं डाका डालने वाला अथवा जेबकतरा धारा 371 के अंतर्गत अपराधी है।
जलसा जी करना धारा 463 के अंतर्गत अपराध है।
जाली नोट को बाजार में चलाने वाला धारा 499 के अंतर्गत अपराध है।
हत्या करने वाला व्यक्ति धारा 302 के तहत अपराधी है।
दहेज के लिए हत्या करने वाले व्यक्ति धारा 304 खाके अंतर्गत अपराधी है ऐसे व्यक्तियों को आजीवन कारावास होम जुर्माना दोनों प्रकार की सजा हो सकती है।
छल करना अथवा बेईमानी से दूसरे की मूल्यवान वस्तु को अपना बना लेना धारा 420 के अंतर्गत अपराध है इसके लिए 7 वर्ष की सजा और जुर्माना दोनों हो सकता है।
किसी के मान सम्मान पर अतिक्रमण करना धारा 500 के अंतर्गत अपराध है इसके लिए 2 वर्ष की सजा एवं जुर्माना दोनों हो सकता है