चाहता हूं।

समर्पित तन समर्पित 
और यह जीवन समर्पित 
चाहता हूं देश की धरती
 तुझे कुछ और भी दूं।




मां तुम्हारा ऋण बहुत है मैं आकिचन
 तुम तो इतना कर रहा फिर भी निवेदन 
थाल में लाऊं सजा कर बाल जब भी
 कर दिया स्वीकार लेना यह समर्पण


दाम समर्पित तन अर्पित
 रक्त का कण कण समर्पित
 चाहता हूं देश की धरती
 तुझे कुछ और भी दूं।

माज तलवार को लगाओ ना देरी।
 बांध दो कसकर कमर पर डाल मेरी
 भाल पर मल दो चरण की धूल थोड़ी
 शीर्ष पर आशीष की छाया घनेरी।