The last bargain.

"आओ मेरे सेवाएं लो, मैं चिलया जब सुबह
मैं पत्थर रास्ते पर चल रहा था।
तलवार हाथ में लिए राजा अपने रथ पर
उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोला मैं अपनी 
ताकत से तुम्हारी सेवा लूंगा
परंतु उसकी शक्ति का महत्व था और वक्त अपने रथ में चला गया।


गर्मी में दोपहर को घर खड़े थे बंद दरवाजों के साथ
मैं भटक रहा था
एक बुड्ढा व्यक्ति आया  सोने से भरा है लीए।
उसने विचार किया और बोला मैं अपने पैसे से तुम्हारी सेवा लूंगा
उसने एक-एक करके अपने को को तौर पर मैंने इनकार


शाम हो चुकी थी बगीचे में सब ओर फूल खिले थे।
सुंदर कन्या आई और बोली मैं एक मुस्कान से तुम्हारी सेवा लूंगी
उसकी मुस्कान फीकी पड़ गई और आंसुओं से पिघल गई और वह वापस अंधेरे में लौट गई।


सूर्य रेत पर चमक रहा था और समुद्री लहरें उठ रही थी ‌
एक बालक बैठा खेल रहा था। सेल के साथ
उसने अपना सिर उठाया और मानो मुझे जानता हो और बोला,
मैं तुम्हारी सेवा बगैर कुछ दिए लेता हूं।
तब से लेकर उस बालक के खेल में लगे मेरे मॉल ने मुझे एक स्वतंत्र व्यक्ति बना दिया।