सुनामी की कहानी

Latest news 26 December 2004
समुंद्र के अंदर भूकंप द्वारा पैदा हुई बड़ी और शक्तिशाली लहर को सुनामी कहते हैं। दिसंबर 26 , 2004 को सुनामी ने थाईलैंड और भारत के हिस्सों जैसे अंडमान और निकोबार दीप समूह और तमिलनाडु के तटीय इलाकों पर प्रहार किया था। यहां हिम्मत और पति जीवन की कुछ कहानियां प्रस्तुत है।



क्या पशु को सुनामी का पूर्वाभास हो गया था? कुछ कहानियां बताती है कि उन्हें आभास हो गया था।

यह सभी कहानियां अंडमान और निकोबार दीप समूह से है। इग्निशियस कछल में एक सहकारी समिति में प्रबंध था। उसकी पत्नी ने उसे सुबह 6:00 बजे उठाया क्योंकि उसने भूकंप महसूस किया इग्नेशिया ने बड़े सावधानीपूर्वक में से अपना टेलीविजन उठाया और जमीन पर रख दिया। ताकि वह नीचे गिर कर टूट ना जाए तब पूरा परिवार  से घर से बाहर निकल गया।

जब हल्के झटके रुक गए उन्होंने समुद्र को उठते देखा अव्यवस्था और हड़बड़ाहट में उनके दोनों बच्चों ने अपने नाना और मामा कहां पकड़ा और विपरीत दिशा में दौड़े इग्नेशिया ने उन्हें दोबारा कभी नहीं देखा। इसकी पत्नी भी बाहरी गई थी केवल 3 बच्चे जो उसके साथ आए थे बचा लिए गए थे।

संजीव पुलिस वाला था जो निकोबार दीप समूह के कछल दीप पर स्वार्था किसी प्रकार उसने स्वयं पत्नी और अपनी बच्ची को तो बचा लिया परंतु फिर उसने भिस्मागिरी के रसोइए जॉन की पत्नी की मदद के लिए पुकार सुनी संजीव उसे बचाने पानी में कूद पड़ा परंतु दोनों बह गए।


13 वर्षीय मेघना अपने माता-पिता और 70 अन्य लोगों के साथ बह गई थी एक लकड़ी के दरवाजे को पकड़े उसने 2 दिन समुद्र में तैरते हुए बिताए 11 बार उसने ऊपर राहत देने वाले हेलीकॉप्टर देखा पर वे उसे नहीं देख पाए एक लहर द्वारा उसे किनारे पर लाया गया और उसे समुद्र किनारे अस्तबल घूमते पाया गया।
अलमास जावेद 10 वर्ष की थी। वह कार्मेल पार्ट ब्लेयर कॉन्वेंट कि छात्र थी। जहां उसके पिता का पेट्रोल पंप था उसकी माता रहीला का घर नानकारी दीप पर था परिवार वहां क्रिसमस मनाने गए हुए था।
जब सवेरे सवेरे भूकंप के लहरे झटके आए तब परिवार सो रहा था। अलमास के पिता ने देखा कि समुद्र का पानी पीछे जा रहा था। उसने समझ लिया। कि पानी अधिक ताकत के साथ फिर वापस आएगा उसने सब को जगाया और उनको सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास किया।

अलमास की माता और आंटियां नारियल के पेड़ के पत्तों से लिपट खड़ी थी। उसे बुला रही थी एक लहर नेपियर उखाड़ दिया और वे सभी बह गए।
तो वह कमोरता कि अस्पताल में थी वहां से वह पोर्ट ब्लेयर लाई गई। छोटी बालिका उस घटना के बारे में किसी से बात नहीं करना चाहती। वह अब भी सपने में हैं।

पिछली सिमथ‌ एक पुरस्कार के साथ है। जो उन्हें बहुत सारी जाने बचाने के लिए मिला था। जब सुनामी ने थाईलैंड के फुकेट समुद्र तट पर प्रहार किया था। फीवर बहुत सारी पुरस्कार जीत चुकी है। तब भी उसने माता पिता ने टेलीविजन पर साक्षरता की अनुमति नहीं दी है। ताकि उसे नायिका बनाया जाए। आप क्यों सोचते हैं कि उन्होंने ऐसा निर्णय लिया?

आप थाईलैंड से एक कहानी
दक्षिण पूर्व इंग्लैंड का सिमत परिवार दक्षिण इंग्लैंड के एक समुद्र तटीय छुट्टी मनाने के स्थान पर क्रिसमस मना रहा था। टिली सीमथ एक 10 वर्षीय स्कूली छात्रा थी। उसकी बहन सा वर्ष की थी उसके अभिभावक पेन और कालिन सिमर थे।
वह 26 दिसंबर 2004 का दिन था। घातक सुनामी लहरें अपनी राह पकड़ ही चुकी थी। वे उस सुबह उत्तरी सुमात्रा में एक भयंकर भूकंप के कारण उठे थी।
"पानी बढ़ता हुआ अंदर आ रहा था पेनी सिमत को याद आया समुद्र तट छोटा और छोटा हो रहा था। मैं नहीं जानती कि क्या हो रहा था।"

परंतु टिली सिमत को आभास था। की कुछ गलत हो रहा था। उसका दिमाग बार-बार भूगोल के उस पार की ओर जा रहा था। जो  उसने मात्र 2 सप्ताह पहले इंग्लैंड में लिया था। परिवार के साथ थाईलैंड की उड़ान भरने से पहले दिल्ली ने देखा कि समुद्र धीरे-धीरे उठ रहा था। झाग बन रहे थे। बुलबुले और जानवर बन रहे थे। उसे याद आया। कि वह यह वर्ष 1946 में हवाई द्वीप समूह पर आए एक सुनामी के चलचित्र में देख चुके थे। उसके भूगोल के शिक्षक ने से वीडियो दिखाकर बताया था। कि सुनामी भूकंप ज्वालामुखी और भू संकलन द्वारा आ सकते हैं।
टिलि ने शोर मचाना शुरू किया ताकि परिवार समुद्र तट छोड़ दे। वह समुद्र के नीचे के भूकंप के बारे में बोली वह भावोन्माद  होती जा रही थी। उसकी मां टेनी ने कहा मैं नहीं जानती थी। कि सुनामी क्या होता है। लेकिन अपनी बेटी को इतना डरा देख मुझे लगा कि कुछ गंभीर बात थी। परिवार ने होटल की तीसरी मंजिल शरण ली इमारत में तीन सुनामी लहरों का प्रकोप सहा था। अगर वे समुद्र तट पर रुक गए होते तो जीवित ना होते।
सीमत परिवार बाद में उस सैलानियों से मिला जो पूरा परिवार खो चुके थे। टिली का और उसके भूगोल के पाठ का शुक्रिया वे आगा हो गए थे। टटीली इंग्लैंड वापस अपने स्कूल गई। और अपने सहपाठियों को अपनी भैया वह कहानी सुनाई।